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पुलिस की पाठशाला में बच्चों ने पढ़ा पुलिसिंग का पाठ

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पुलिस लाइन में सोमवार को नजारा दूसरे दिनों की अपेक्षा एकदम जुदा और बेहद खास था। शहर के नामी स्कूलों के सैकड़ों बच्चे पुलिस की कार्यप्रणाली से रुबरु हुए,  मौका था अमर उजाला की ओर से आयोजित पुलिस की पाठशाला का। एसएसपी के साथ तीन घंटे तक बच्चों ने पुलिसिंग के प्रति काफी कुछ समझा, जाना और मस्ती भी की। एसएसपी ने पुलिस को लेकर बच्चों के बेबाक सवालों का जवाब देकर उनकी जिज्ञासा को शांत किया। बच्चों के लिए असलहों की प्रदर्शनी लगाई गई, वहीं लाठीचार्ज का भी डैमो दिया गया। पाठशाला को लेकर बच्चों में खासा उत्साह रहा।
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सोमवार को ऑडिटोरियम हॉल में एसएसपी केवल खुराना ढेर सारे अनुभवों के साथ स्कूली बच्चों के बीच पहुंचे। उन्होंने कहा पुलिस समाज के बीच से ही आती है। अगर समाज अच्छा है तो पुलिस भी अच्छी होगी। पुलिस को खराब बताने वाले 90 फीसदी लोग वे होते हैं, जो कभी पुलिस के संपर्क में नहीं आते हैं। उन्होंने पुलिस में कांस्टेबल से लेकर डीजी रैंक के साथ ही आईपीसी, सीआरपीसी के बारे में बच्चों को बताया। कहा कि मुंबई, दिल्ली की तरह उत्तराखंड में कमिश्नरी सिस्टम नहीं है। कमिश्नरी सिस्टम में पुलिस के पास बहुत अधिकार रहते हैं।

भारत ही एकमात्र ऐसा देश है, जहां पुलिस के सामने दिए आरोपी को कोर्ट नहीं मानता है। बीते दिनों हुए कार्तिक घई अपहरण कांड का जिक्र करते हुए उन्होंने बच्चों से मोबाइल फोन और सोशल साइट्स का इस्तेमाल करने मेें सावधानी बरतने की अपील की। कहा तकनीक का सही इस्तेमाल करना गलत नहीं है। उन्होंने पुलिस हेल्पलाइन के साथ ही खुद का नंबर मुहैया कराते हुए बच्चों से कहा कि अपने आसपास हो रही गलत गतिविधियों की जानकारियां इन नंबरों पर दें। पुलिस से डरने की नहीं, बल्कि सहयोग की जरूरत है।
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गलत गतिविधियों को नजरअंदाज ना करें। बच्चे अपनी ऊर्जा सकारात्मक चीजों में लगाएं। नकारात्मक सोचेंगे तो नकारात्मक ही होगा। उन्होंने स्टीफन हाकिन्स से सीख लेते हुए काम से भागने के बजाए काम करने के बहाने खोजने को कहा। उन्होंने कहा कि लोगों की परवाह किए बगैर जो मन में आए वो काम करें। सिस्टम को खराब कहकर दूसरों पर दोषारोपण करने के बजाए अगर हर आदमी खुद की गारंटी ले तो सिस्टम खुद-ब-खुद ठीक हो जाएगा। उन्होंने कहा गलत करने वाले को पुलिस का डर होना चाहिए। उनकी कोशिश है कि आम आदमी के जेहन से पुलिस का डर हटना चाहिए।
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