फिरौती की रकम से खुद की दरिद्रता को दूर करने का जो मंसूबा रमेश ने पाला था, उसमें तो वह कामयाब नहीं हो पाया, लेकिन उसके घिनौने कृत्य ने मानवीय संवेदनाओं को तार-तार कर दिया। पिता की मौत के बाद रजनेश को प्रोविडेंट फंड के रूप में मिली 14 लाख की भारी भरकम धनराशि को हड़पने के लिए रजनेश के सगे मामा ने उसके पुत्र अंश की फिरौती का तानाबाना एक महीने पहले ही बुन लिया था।
क्योंकि रजनेश के पिता की मौत करीब एक साल पहले हुई थी और अप्रैल के प्रथम सप्ताह में उनकी नौकरी के पीएफ व अन्य भत्तों का भुगतान करीब 14 लाख रुपये हुआ था। यहीं से रजनेश के मन में लालच आ गया और वह लाखों रुपये की रकम अपने कब्जे में करना चाहता था।
गूलरभोज निवासी रजनेश के पिता चंदा रेलवे में चतुर्थ श्रेणी के पद पर कार्यरत थे। साल भर पहले उसके पिता का ड्यूटी के दौरान ही देहांत हो गया था। इसके बाद रजनेश को रेलवे में मृतक आश्रित कोटे से जहां नौकरी मिल गई, वहीं पिता के प्रोविडेंट फंड की 14 लाख रुपये की धनराशि भी अप्रैल में मिल गई थी।
रजनेश को प्रोविडेंट फंड के 14 लाख क्या मिले रमेश के दिल पर सांप लोट गया और उसने यहीं से रजनेश की रकम हड़पने को साजिश रच डाली। बस उसे इंतजार था तो इस बात का कि उसे अपने काम को कब और कैसे अंजाम देना है। इसमें उसने अपने बेटे रवि को भी शामिल कर दिया।
रमेश को पता था कि उसका बेटा रवि बड़ा ही शातिर किस्म का है और इस षड्यंत्र में वह उसकी मदद कर सकता है। उसने रजनेश के तीन वर्षीय पुत्र अंश को अगवा कर लिया। अपहरण के इस घिनौने खेल में उसके 18 साल के पुत्र रवि ने पूरा साथ दिया। बच्चे को उठाने से लेकर उसकी मौत और फिर दफनाने की साजिश में में दोनों बाप-बेटे ही शामिल रहे।
उम्र 18 साल और अंदाज पेशेवर मुजरिम जैसा
दसवीं का छात्र और अंदाज पूरी तरह से पेशेवर मुजरिम जैसे। जिस तरह से रवि ने घटना में मासूम को उठाने से लेकर उसे दफनाने में भूमिका निभाई है, वह कम चौंकाने वाली नहीं है। मासूम के अपहरण के बाद से ही वह गली चौराहों की रेकी करता रहता था। पुलिस की गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जाती थी।
इतना ही नहीं उसका पूरा दिन चौराहे में एक टेलर मास्टर की दुकान पर ही बीतता था और वहीं से वह रजनेश को फोन पर धमकाने का काम भी करता था। रवि ने 4 मई से 10 मई के बीच आठ मोबाइल और 4 सिम का प्रयोग रजनेश को फोन करने के लिए किया था। इतना ही नहीं हर फोन कॉल के बाद रवि सिम कार्ड को तोड़ कर जला दिया करता था। रवि पूरे घटनाक्रम को फिल्मी अंदाज में करता चला गया।
गहरी नींद में ही दफना दिया बच्चा
मासूम अंश को एक्सपायरी डेट की नींद की गोली खिलाने के बाद अंश बेहोश हो गया था। सुबह जब वह नहीं उठा तो रमेश और रवि ने उसे मृत समझकर उसे पास के ही खेत में जिंदा दफना दिया। पुलिस पूछताछ में बच्चे के मुंह से झाग निकलने की बात भी झूठी निकली है। इतना ही नहीं रमेश द्वारा अपनी बहन के वंश को आगे बढ़ाने के लिए अंश को उसे देने की बात भी मनगढ़ंत साबित हुई है। मासूम की हत्या करने के बाद भी रमेश बार-बार पुलिस को गुमराह करने का प्रयास करता रहा।
रमेश को समारोह में आने से किया था मना
रुद्रपुर। सफेद दाग की बीमारी होने के कारण रजनेश ने रमेश से उसके छोटे भाई की सालगिरह में उसे नहीं बुलाया था। जब वह रमेश के घर न्योता देने गए तो उन्होंने रमेश को समारोह में न आने को कहा था। यह बात भी रमेश के मन में घर कर गई और उसने रजनेश को सबक सिखाने का पूरा मन बना लिया था। रजनेश ने रमेश को छोड़कर उसके सभी परिजनों को समारोह में बुलाया था। इसके बावजूद वह गूलरभोज पहुंचकर अंश को अगवा करने में सफल रहा।
मासूम अंश के हत्याकांड में पिता और पुत्र दोनों ही काफी शातिराना किस्म के अपराधी हैं। इसमें रमेश का 18 साल का बेटा रवि बहुत शातिर दिमाग का है। घटनाक्रम में रवि ने पूरी तरह से फिल्मों के स्टाइल को अपनाया। अंश को दफनाने के बाद से वह प्रतिदिन दोराहे चौराहे पर स्थित दर्जी की दुकान में पूरे दिन रहता था, वहीं से वह फोन करता था और पुलिस की हर गतिविधि को भी भांप रहा था। इस दौरान रवि ने करीब 8 मोबाइल और चार सिम भी बदले हैं। जब भी वह फिरौती के लिए कॉल करता था उसके बाद सिम को जला देता था। चौथे सिम से कॉल करने के बाद वह उसे नहीं जला पाया। यहीं से उसकी लोकेशन पकड़ में आयी। दोनों को जेल भेज दिया गया है। -पंकज भट्ट, अपर पुलिस अधीक्षक
हत्यारोपी पिता-पुत्र को भेजा जेल
मासूम अंश की हत्या में लिप्त रमेश और उसके पुत्र रवि को पुलिस ने अदालत में पेश करने के बाद जेल भेज दिया है, जबकि अंश मर्डर केस के बाद हिरासत में ली गई रमेश की पत्नी कैलाशो को पुलिस ने पूछताछ के बाद छोड़ दिया। पुलिस ने कैलाशो से कई एंगल से पूछताछ की, लेकिन उसने अपहरण की वारदात के बारे में जानकारी होने से इंकार कर दिया, जिसके बाद पुलिस ने कैलाशो को छोड़ दिया।