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15 मई से बंद हो जाएगी पीलीभीत-टनकपुर रेल सेवा

Tue, 03 May 2016 12:10 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, ऊधमसिंह नगर
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पीलीभीत-टनकपुर तक बड़ी रेल लाईन बिछाने की वजह से 15 मई से इस रूट की ट्रेनें अनिश्चितकाल के लिए बंद रहेंगी। प्रतिदिन करीब 50 हजार रुपये के टिकट खरीदने वाले यात्री अब पूरी तरह से रोडवेज पर निर्भर रहेंगे। 
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इस दौरान विभिन्न प्रदेशों की बसें इस रूट पर सवारियों के लिए दौड़ेंगे। इनमें उत्तराखंड राज्य सड़क परिवहन निगम टनकपुर क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।

ब्राडगेज निर्माण के चलते पीलीभीत-टनकपुर तक रेल सेवा बंद होने और यात्रियों की सुविधा के लिए अतिरिक्त व्यवस्था के सवाल पर एआरएम पवन मेहरा ने फिलहाल अनभिज्ञता व्यक्त की है। 
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उन्होंने बताया कि क्षेत्रीय प्रबंधक टनकपुर को लिखा जा चुका है कि नई बसों की खेप पहुंचने तक लोहाघाट डिपो की बसों की मरम्मत कर रूट पर उतारा जाय ताकि खटीमा-पीलीभीत रूट पर एकाएक सवारियों का दबाव न बन सके। 

आरएम मेहरा ने बताया उत्तराखंड राज्य सड़क परिवहन निगम टनकपुर क्षेत्र मार्च 2014 में 40 लाख लाभांश ले चुका है। मार्च की तुलना में डिपों की स्थिति वर्ष 2008 ज्यादा सुदृढ़ थी । 

उत्तराखंड राज्य सड़क परिवहन निगम रुद्रपुर के एआरएम केएस राणा बताते हैं कि बड़ी रेल लाइन बिछाने की स्थिति में रुद्रपुर डिपो पांच नई बसें लगाएगा। उन्होंने कहा कि यदि रूट पर सवारियां खड़ी मिली तो वह बसों की संख्या और बढ़ाऐंगे। 

रेलवे स्टेशन अधीक्षक पीके श्रीवास्तव बताते हैं कि प्रतिदिन 50 हजार रुपये के टिकट बिकते हैं। जबकि बस का किराया रेल किराए से तीन गुना अधिक है। बस स्टेशन पर पूछताछ कक्ष और जलापूर्ति के सवाल पर एआरएम मेहरा ने बताया कि बस स्टेशन पर पेयजल व्यवस्था सहित आने जाने वाली बसों की जानकारी के लिए एक कर्मचारी तैनात है।

अधिकांश बसे चली हैं 9 से 10 लाख किमी
उत्तराखंड राज्य सड़क परिवहन निगम टनकपुर क्षेत्र में यात्री बसों की संख्या लगातार घटने लगी है। विभागीय सूत्रों की मानें तो तीन वर्ष पूर्व टनकपुर डिपों में 135 बसें थी। गत वर्ष 114 बसें थी। 

वर्तमान में इनकी संख्या 90 रह गई है। इतना ही नहीं इनमें अधिकांश बसें नौ से 10 लाख किलोमीटर चल चुकी है। वहीं इनमें से लगभग 51 बसें नीलाम होने की स्थिति में हैं। एआरएम मेहरा ने इस बात की पुष्टि कर कि अधिकांश बसें नौ से 10 लाख किमी चल चुकी हैं।
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