बाजपुर। चार दिन पहले कब्जे में ली गई सीलिंग की करीब 642 बीघा (40 हेक्टेयर) जमीन पर राजस्व टीम ने चेतावनी बोर्ड लगाया। आक्रोशित लोगों ने जमकर हंगामा किया। इस दौरान राजस्व टीम और लोगों की तीखी झड़प हो गई। बताते हैं कि राजस्व टीम के लौटने पर लोगों ने बोर्ड को फिर उखाड़ दिया। विरोध के चलते राजस्व टीम खेत के दूसरे छोर पर एक बोर्ड लगाकर लौट आई।
बता दें कि 1947 मेें गांव दियोहरी निवासी सुंदर सिंह के खिलाफ राजस्व विभाग की तरफ से सीलिंग जमीन मामले में केस दर्ज किया गया। सुंदर सिंह की मृत्यु के बाद उसके पुत्र भगतेंद्र सिंह, जोगेंद्र सिंह, जसविंदर सिंह, राजेंद्र सिंह, करमेंद्र सिंह आदि ने कई न्यायालयों की शरण ली। लेकिन कोई राहत नही मिली। आठ नवंबर 2016 को हाईकोर्ट ने सीलिंग मामले को अपर जिलाधिकारी न्यायालय को निस्तारण करने के निर्देश दिए।
जिसकी सुनवाई करते एडीएम प्रताप शाह ने सीलिंग जमीन को सरकार के पक्ष में घोषित कर दिया। एक मार्च 2017 को तहसीलदार केके पाल ने राजस्व टीम के साथ मौके पर पहुंचकर सीलिंग जमीन पर कब्जा ले लिया। शनिवार को राजस्व निरीक्षक कुंवर सिंह और अन्य कर्मचारी चेतावनी बोर्ड चस्पा करने पहुंचे। बोर्ड देखते ही लोग आक्रोशित हो गए। उन्होंने हंगामा कर दिया। इस दौरान खेत में लगाए गए बोर्ड को लोगों ने उखाड़ दिया। कानूनगो ने समझाकर लोगों का शांत किया। कर्मियों ने लोगों से बोर्ड लेकर खेत में दूसरे स्थान पर लगाया और लौट आए।
बाजपुर। बोर्ड पर साफ तौर पर लिखा है कि सीलिंग में अतिरिक्त रूप से घोषित भूमि पर कब्जा लिया जा चुका है। भूमि और फसल को खुर्द बुर्द करने वाले व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। तहसीलदार पाल ने बताया कि आबादी वाली जमीन को कब्जे में नही लिया गया है। बताया कि बोर्ड का कुछ लोगों ने विरोध किया था। समझाने पर लोगों ने खेद व्यक्त करते हुए बोर्ड को खुद लगा दिया है।
बाजपुर। राजस्व निरीक्षक कुंवर सिंह ने बताया कि बोर्ड लगाने पर विरोध हो गया। जिस पर एक बोर्ड लगा दिया। एक बोर्ड वापस ले आए। उच्चाधिकारियों को घटना से अवगत करा दिया गया है। शांति कॉलोनी निवासी मलखान सिंह कहते हैं कि मजदूरी करके लोगों ने तीन चार साल पहले स्टांप पर जमीन खरीदी थी। मेहनत मजदूरी करके मकान बनाए है। अब उन्हें जमीन से हटाने की कार्रवाई चल रही है। जो न्याय संगत नहीं है। मलखान सिंह के अनुसार कालोनी में करीब 90 परिवार बसे है।