काशीपुर। सस्ती जमीन पर घर बनाने की चाहत में लोग जान तक की परवाह नहीं कर रहे हैं। हाईटेंशन लाइन के नीचे आवासीय प्लॉट और मकान बनाने के मामले सामने आने पर पिटकुल की ओर से नोटिस देने की कार्रवाई की जा रही है। कुछ स्थानों पर पिटकुल ने निर्माण कार्य रुकवाया है। हाईटेंशन लाइन के नीचे घर बनाने से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
वहीं हादसा होने पर ऊर्जा निगम को मुआवजा भी देना पड़ता है। विद्युत लाइन बार-बार ट्रिप भी होती है जिसे ठीक करने में दिक्कत भी होती है। ऐसे में पिटकुल की ओर से स्थानीय प्रशासन को पत्र देने के साथ ही चिह्नित लोगों को नोटिस दिया जाता है।
क्या है नियम
- 132 केवीए हाईटेंशन तारों के नीचे कम से कम 23 मीटर के कॉरिडोर के बाहर मकान बना सकते हैं।
- 220 केवीए हाईटेंशन तारों से कम से कम 35 मीटर की दूरी पर रिहायशी मकान होने चाहिए।
चंद सेकेंड में होती है मौत
विशेषज्ञों के मुताबिक, हाईटेंशन तारों के चारों कॉरिडोर में विद्युत चुम्बकीय क्षेत्र बन जाता है। इसकी चपेट में कोई भी जीव आ जाए तो कुछ ही सेकंड में उसकी मौत हो जाती है।
हाईटेंशन लाइनों को शिफ्ट करना संभव नहीं
पिटकुल के अधिशासी अभियंता राकेश बिजलवान बताते हैं कि हाईटेंशन लाइन के नीचे मकान बनाने या कोई भी निर्माण करने वाले को नोटिस दिए जाते रहे हैं। लाइन पहले बनती हैं और बाद में उनके नीचे और आसपास निर्माण किया जाता है। लाइनों को शिफ्ट किया जाना संभव नहीं होता।