उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) ने कोसी और दाबका नदी क्षेत्रों में स्थित 49 स्टोन क्रशरों को दी गई संचालन सहमति को अनिश्चितकाल के लिए निलंबित कर दिया है। बोर्ड ने क्रशरों को नोटिस देकर आदेशों का अविलंब अनुपालन करने और इसकी सूचना बोर्ड कार्यालय को देने के निर्देश दिए हैं।
पीसीबी की कार्रवाई से क्रशर संचालकों में खलबली मच गई है। जिला खनन अधिकारी ने पीसीबी के आदेश की प्रतिलिपि मिलने की बात कही है लेकिन कार्रवाई के लिए मुख्यालय या डीएम की ओर से कोई आदेश मिलने से इनकार किया है। उक्त दोनों नदियों में खनन क्षमता कम होने को लेकर एनजीटी में शिकायतें की गईं थीं, जिसका संज्ञान लेकर एनजीटी ने लिया और उक्त कार्रवाई की गई।
कुछ महीने पहले रामनगर के सक्खनपुर में निर्माणाधीन क्रशर पर एनजीटी ने रोक लगा दी थी। एनजीटी ने पीसीबी को कोसी और दाबका नदी क्षेत्र में इस तरह के मामलों में अपने स्तर पर कार्रवाई करने के आदेश दिए थे। पीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी सुभाष चंद्र पंवार ने एनजीटी के आदेश का हवाला देते हुए जिले में बाजपुर, काशीपुर के 49 क्रशरों की संचालन सहमति को अग्रिम आदेशों तक निलंबित कर दिया है। इससे संबंधित नोटिस क्रशर संचालकों को दिया गया है। इसमें बोर्ड के आदेशों का अविलंब अनुपालन सुनिश्चित कर इससे कार्यालय और बोर्ड मुख्यालय को भी सूचित करने को कहा है।
चेतावनी दी गई कि अगर आदेश का अनुपालन नहीं किया गया तो उद्योग के खिलाफ कार्रवाई के लिए बोर्ड मुख्यालय को संस्तुति की जाएगी। इसकी प्रतिलिपि बोर्ड के सदस्य सचिव के साथ ही डीएम और जिला खनन अधिकारी ऊधमसिंह नगर को भेजी गई है। इस कार्रवाई से बाजपुर और काशीपुर क्षेत्र के क्रशर संचालकों में खलबली मची हुई है।
उन्होंने बोर्ड की कार्रवाई को गलत करार दिया है। इस संबंध में क्षेत्रीय अधिकारी से संपर्क नहीं हो सका है। इधर, जिला खनन अधिकारी दिनेश कुमार ने बताया कि उन्हें क्रशरों को लेकर पीसीबी के आदेश का पत्र मिला है लेकिन विभागीय मुख्यालय या डीएम की ओर से आदेश मिलने के बाद ही बोर्ड के आदेश के अनुपालन की कार्रवाई कराएंगे।