मौत जीवन का शाश्वत सत्य है लेकिन जिंदगी को गहरे जख्मों के साथ गुजारना और फिर मरने के बाद भी सुकून की चिता का न मिलना... ऐसा ही कुछ जीवन गुजरा पार्वती देवी का और उसके बाद फिर उनकी मौत का सफर भी मन को कचोटने वाला ही रहा। शोर भरे काशीपुर में मौत कब चुपचाप उन्हें अपने साथ ले गई, आसपास रहने वाले किसी को पता नहीं चला। करीब 10 दिन पुराना उनका शव सड़ी-गली हालत में घर से बरामद किया गया है।
आवास विकास की कृष्ण नगर कॉलोनी में रेलवे में कार्यरत बालेराम नामक एक व्यक्ति का मकान है। उनके परिवार में एक बेटी व दो बेटे थे। कॉलोनीवासियों ने बताया कि बालेराम रेलवे से लगभग 10-15 वर्ष पहले सेवानिवृत्त हुए थे। कुछ साल पहले उनकी मौत हो गई जिसके बाद घर में उनके दोनों बेटे और बेटी पार्वती (55) रह रहे थे। बताया जा रहा है कि उनके तीनों बच्चे अविवाहित थे। वर्ष 2016 में एक बेटे की मौत हो गई थी जबकि दूसरे की लगभग तीन साल पहले मौत हो गई।
इसके बाद से परिवार में अकेली पार्वती ही थी, जो इसी मकान में रह रही थी। आंखों के सामने पिता और दो भाइयों का दुनिया से चले जाना और पूरी जिंदगी को अकेले जीना, पार्वती को शायद इतना कचोट गया था कि वह कॉलोनी में किसी से कोई मतलब नहीं रखती थी। कॉलोनी निवासी एवं भाजपा नेता बिट्टू राणा ने बताया कि वह घर से बहुत कम ही निकलती थीं और पिता की पेंशन से ही गुजर-बसर कर रही थीं। उन्होंने बताया कि लगभग 10-15 दिन से किसी ने भी महिला को बाहर नहीं देखा था।
महिला का शव पूरी तरह से सड़-गल चुका था। यहां पोस्टमार्टम नहीं होने के कारण शव को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया। पोस्टमार्टम के बाद ही महिला की मौत का कारण स्पष्ट हो सकेगा।- दीपक सिंह, सीओ, काशीपुर