रुद्रपुर। कर्मचारियों के भविष्य के प्रति चिंतित केंद्र सरकार ने उत्तराखंड पर फोकस किया है। इसकी पड़ताल के लिए विभिन्न दलों के 15 सांसदों का दल मंगलवार रात यहां पहुंचा है। कार्यक्रम में पार्टीबाजी न हो, इसलिए इस दल की सूचना गोपनीय रखी गई है। इस कारण दलों के पदाधिकारियों तक को इसका पता नहीं है, ताकि इसमें दलगत राजनीति न हो सके। इसलिए सिर्फ डीएम को ही इस जानकारी दी गई है ताकि दल के रहने, ठहरने में कोई व्यवधान पैदा न हो।
प्रदेश की औद्योगिक नगरी बन चुके इस जिले पर केंद्र सरकार की निगाहें भी टिकी हैं। यहां भारी मात्रा में विदेशी निवेश को लेकर पहले ही केंद्र, राज्य सरकार यहां विदेशी कंपनियों को लाने का मन बना चुकी है। विदेशी कंपनियों के साथ राज्य सरकार का करार भी हो चुका है।
वहीं अब कर्मचारियों के भविष्य के प्रति भी सरकार ने कदम बढ़ा दिया है क्योंकि पंतनगर सिडकुल में करीब 469 से अधिक फैक्ट्रियों का उत्पादन करके विदेशों तक आयात, निर्यात कर रहे हैं वहीं इन फैक्ट्रियों में डेढ़ लाख से अधिक श्रमिक, कर्मचारी कार्यरत हैं।
साथ ही जिला स्तर पर भी कर्मचारियों की विभिन्न पदों पर गैर सरकारी, सरकारी पदों पर तैनाती है। इसी को देखते हुए 15 सांसदों का दल यहां दो दिवसीय अपने विशेष, गोपनीय दौरे पर है। इस बारे में डीएम डॉ. नीरज खैरवाल का कहना है कि इस दल में विभिन्न समितियों के तहत पीएफ कमिश्नर से लेकर अन्य लोगों का भी दल साथ है, इसलिए ठहरने का इंतजाम जिला प्रशासन की ओर से नैनीताल हाइवे स्थित एक बड़े होटल में किया गया है।
बैठक में कर्मचारियों के हितों पर किस तरह का मंथन होना है, इस पर उन्होंने अपनी कोई राय नहीं दी है। सूत्रों का कहना है कि 15 सांसदों के इस दल के आने का विशेष कारण केंद्र सरकार की कर्मचारियों के भविष्य निधि के मामलों को लेकर मंथन बैठक में पड़ताल करना है।
रुद्रपुर। कर्मचारियों के भविष्य के प्रति चिंतित केंद्र सरकार ने अपनी नई पहल करते हुए कर्मचारियों के भविष्यनिधि के मामलों में कहीं स्थानीय राजनीति के तहत लीपापोती न हो, इसलिए उन्होंने क्षेत्र के सांसदों को दूसरे प्रांतों में पड़ताल के लिए भेजा है।
नैनीताल, ऊधमसिंह नगर संसदीय क्षेत्र के सांसद भगत सिंह कोश्यारी मंगलवार को असोम में पड़ताल कर रहे हैं। अपने क्षेत्र से दूर दूसरे प्रांतों में एकाएक इस तरह की पड़ताल कर्मचारियों के हितों में मानी जा रही है। सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सांसदों को सिर्फ नेतागिरी तक सीमित न रख उन्हें काम करने की जिम्मेदारी सौंपी है और सीधे तौर पर सांसदों की रिपोर्ट को भी सीधे प्रधानमंत्री तक देने का प्रस्ताव दिया गया है।