उत्तराखंड पुलिस में विकास चौधरी नाम बहादुरी की मिसाल में गिना जाता है। नौ साल एसओजी में रहने वाले विकास चौधरी के नाम से कुख्यात अपराधी भी थर्रा उठते हैं। पैरालाइसिस रोग ने उन्हें विकलांग तो बना दिया। लेकिन, हौंसले आज भी पहले की तरह बुलंद हैं और सर्विलांस के माध्यम से कुख्यात अपराधी उनकी रडार पर रहते हैं। यही वजह है, उनके टैलेंट और जज्बे को हर कोई सलाम करता है। सर्राफ हत्याकांड के खुलासे में अहम भूमिका निभाने पर डीआईजी पीएस सैलाल और एसएसपी नीलेश आनंद भरणे ने कोतवाली में जनसमूह के सामने उनकी पीठ थपथपाई।
मूलरूप से मेरठ के रहने वाले एसओजी सर्विलांस इंचार्ज विकास चौधरी वर्ष 2002 बैच के दरोगा हैं। पुलिस में भर्ती होने के बाद पहली पोस्टिंग उनकी खटीमा कोतवाली में हुई। जहां एक माह तक सिविल पुलिस का काम किया। उसके बाद एसओजी में तैनात कर दिया गया। विकास चौधरी ने एसओजी में रहकर ऊधमसिंह नगर और नैनीताल जनपद में कुख्यात अपराधियों के पसीने छुड़ाए। विभागीय कार्य के प्रति समर्पण और काम में निर्भीक व तेज तर्रार विकास चौधरी को वर्ष 2006 में तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अमित कुमार सिन्हा ने एसओजी इंचार्ज बनाया। जिसके बाद उन्होंने सितारगंज के राइस मिलर गोविंदा अपहरण कांड, रुद्रपुर के खानपुर की बैंक डकैती, सितारगंज में ओरियंटल बैंक लूट, गदरपुर में पीएनबी बैंक लूट, बाजपुर में नीलम ज्वैलर्स डकैती, केलाखेड़ा डकैती कांड आदि का खुलासा करने में अहम भूमिका अदा की और अपराधियों को जेल भेजा।
इसके अलावा वर्ष 2010 में नैनीताल जिले में एसओजी के इंचार्ज के रूप में तैनात हुए। यहां भी उन्होंने रमेश बंबइया और पीपी जैसे कुख्यात बदमाशों के गुर्गों को सलाखों के पीछे भेजने में अहम भूमिका निभाई। वर्ष 2011 में एक घटना के खुलासे के लिए दबिश देने के दौरान लोड पिस्टल कमर में लगाते वक्त चल गई और गोली उनकी रीढ़ की हड्डी में धंस गई। घाव तो भर गया। लेकिन, गोली लगने से दोनों पैरों में पैरालाइसिस हो गया। विकास चौधरी के इरादे फिर भी न डिगे और एक वर्ष के बाद उन्होंने अपराधियों को पकड़ने लिए सर्विलांस को माध्यम बना लिया। जिससे उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश के कुख्यात अपराधी आज भी उनकी रडार पर रहते हैं। सितारगंज के सर्राफ हत्याकांड के खुलासे में लगी टीमों के अलावा सर्विलांस इंचार्ज चौधरी से एसएसपी नीलेश आनंद भरणे लगातार पल-पल की अपडेट लेते थे। बृहस्पतिवार को डीआईजी और एसएसपी ने सर्राफ हत्याकांड का खुलासा करने के बाद सीधे सर्विलांस इंचार्ज विकास चौधरी के पास जाकर जनसमूह के सामने उनकी पीठ थपथपाई।