पंतनगर। दिनेशपुर के स्नातक छात्र सोमेश शर्मा ने तकनीक और रसायनों का प्रयोग किए बिना काई से कागज बनाया है। दावा है कि यह कागज में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाकर बनाए जाने वाले कागज से कहीं अधिक मजबूत और टिकाऊ है।
जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में कारपेंटर रहे रमाशंकर शर्मा वर्ष 2018 में सेवानिवृत्त होकर अपने पैतृक आवास चंडीपुर दिनेशपुर में परिवार सहित रहते हैं। उनका पुत्र सोमेश शर्मा सरदार भगत सिंह स्नातकोत्तर महाविद्यालय में स्नातक (जेडबीसी) द्वितीय वर्ष का छात्र है। सोमेश ने बताया कि वह शैक्षिक भ्रमण पर लालकुआं की सेंचुरी पल्प एंड पेपर फैक्टरी गया था, जहां उसने लकड़ी से कागज बनते देखा। उसे ख्याल आया कि क्यों न किसी ऐसी चीज से कागज बनाया जाए जो निष्प्रयोज्य हो और उसका पर्यावरण पर कोई विपरीत प्रभाव भी न पड़े। उसने अपने घर पर ही प्रयास करने शुरू कर दिए और अंत में काई से कागज बनाने में सफलता हासिल कर ली। सोमेश ने बताया कि 20 कागज (ए-4 शीट) बनाने में कोई खर्च नहीं आया है, बस मेहनत लगी है। इसमें कोई तकनीक या रसायनों का प्रयोग नहीं किया है।
आशियन वर्ल्ड रिकाॅर्ड में दर्ज कराया नाम
पंतनगर। सोमेश ने काई से कागज बनाने के बाद बुधवार को पहली बार उत्तराखंड जैव प्रौद्योगिकी परिषद (बायोटेक) में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित सेमिनार में प्रस्तुत किया था। इसका परीक्षण करने के बाद प्रोनेस एशिया मलेशिया के संस्थापक मनीमरण सुपिया ने इसे वैश्विक स्तर की उपलब्धि मानते हुए सोमेश को हैंड मेड पेपर मेड फ्राॅम रिवर मास के लिए आशियन वर्ल्ड रिकाॅर्ड से सम्मानित किया है। उनकी प्रेरणा से सोमेश इस कागज का पेटेंट कराने की तैयारी कर रहे हैं।
ऐसे बनाया काई से कागज
पंतनगर। सोमेश ने बताया कि पहले उसने नदी और नालों से काई को एकत्र कर सुखाया, फिर उसे उबालकर उसमें मौजूद जीवाणु नष्ट किए। उसके बाद समतल स्थान पर उसे महीन परत के रूप में बिछाकर भारी दबाव डाला और सूखने के बाद कागज बनकर तैयार हो गया। इसके बाद कागज को ए-4 आकार में काटकर शीट तैयार कर दी। बताया कि काई का रंग हरा होने के कारण कागज का रंग भी हरा है। यदि इसे किसी और रंग में बनाना हो, तो ब्लीच करने के बाद मनचाहा रंग दिया जा सकता है। कागज बनाने में सोशल मीडिया का भी सहारा नहीं लिया है।