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देश सेवा में गंवाया पंचा, लेकिन नहीं ली राज्य के किसी जनप्रतिनिधि ने सुध

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पुंछ बॉर्डर पर तैनात जवान कैलाश कांडपाल। - फोटो : KASHIPUR
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काशीपुर। देश की सेवा करते हुए पैर का दायां पंजा गंवा चुके आर्मी जवान और राष्ट्रीय वेटलिफ्टर कैलाश मौत से जंग जीतकर दो महीने बाद घर पहुंचे लेकिन चार दिन बाद भी किसी जनप्रतिनिधि के सुध न लेने से वह आहत हैं।
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मानपुर रोड स्थित राजपुरम कालोनी निवासी ख्यालीराम कांडपाल के पुत्र कैलाश चंद्र कांडपाल के परिवार की आर्थिक स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं है। वह वर्ष 2007 से स्पोर्ट्र्स स्टेडियम में अंतर्राष्ट्रीय वेटलिफ्टर कोच राजीव चौधरी व बेनी माधव से वेटलिफ्टिंग का प्रशिक्षण लेने लगे। चार वर्ष में देश और प्रदेश को आधा दर्जन से अधिक पदक दिलाए।
वर्ष 2011 में स्पोर्ट्स कोटे से आर्मी के इंजीनियर कोर ग्रुप में भर्ती हुए। दीमापुर नागालैंड में पहली तैनाती हुई। वर्ष 2012 में आर्मी की ओर से दिल्ली में आयोजित जूनियर नेशनल वेटलिफ्टिंग में रजत पदक झटककर देश का मान बढ़ाया।
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जनवरी 2019 में उनकी तैनाती पुंछ में हुई। सात जून को पाकिस्तान बॉर्डर पर कैलाश सहित पांच अन्य जवान जमीन में दबी माइंस को निकाल रहे थे। 25 माइंस निकालने के बाद कैलाश का दायां पैर अचानक माइंस पर पड़ गया। धमाके के साथ ब्लास्ट हुआ जिससे उनके दाएं पैर का पंजा क्षतिग्रस्त हो गया।
साथी जवानों ने कैलाश को ऊधमपुर स्थित आर्मी अस्पताल में भर्ती कराया। दो महीने तक इलाज कराने के बाद उनको पैर का पंजा गंवाना पड़ा। अब वह दिव्यांग की जिंदगी जीने को मबजूर हैं। कैलाश बीती छह अगस्त को अस्पताल से अपने घर पहुंचे। खिलाड़ी व लोगों का हालचाल पूछने वालों का तांता लगा है। वहीं क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि सहित खेल मंत्री का क्षेत्र होने के बावजूद घायल खिलाड़ी की सुध तक लेने कोई नहीं पहुंचा।
अचानक ही बदल गए हालात के बावजूद कैलाश में देश सेवा करने का हौसला बरकरार है। आर्थिक तंगी से जूझ रहे कैलाश ने कहा कि खेल मंत्री से पैरा ओलंपिक खेल में जाने की गुजारिश करता हूं। साथ ही मुख्यमंत्री राहत सहायता मिल सके, जिससे वह परिवार का भरण पोषण कर सके।
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