जिला प्रशासन के निर्देश पर छह जगहों पर सहकारी और मार्केटिंग विभाग ने धान खरीद केंद्र खोल दिए हैं। लेकिन किसानों की सूची राजस्व विभाग की तरफ नहीं भेजने के कारण एक केंद्र को छोड़कर बाकी जगहों पर खरीद शुरू नहीं हो सकी। जिसके चलते किसान धान बिचौलियों को बेचने को मजबूर हो रहे हैं।
सहकारी क्रय विक्रय समिति बांसखेड़ा, पुरानी अनाज मंडी, दक्षिणी किसान सहकारी सेवा समिति आलूफार्म, उत्तरी किसान सहकारी सेवा समिति कुंडा, कुंडेश्वरी किसान सहकारी समिति धान खरीद केंद्र खोले हैं। मंडी धान से पटने लगी है। लेकिन केंद्रों के पास अभी तक राजस्व विभाग ने किसानों की सूची नहीं भेजी है। किसानों को गेहूं व मटर की फसल बुआई करने की जल्दी है, इसलिए खेत खाली करने के लिए फसल की कटाई शुरू कर दी है। राजस्व विभाग से सभी संलग्न गांवों के किसानों की सूची नहीं आने से सरकारी खरीद केंद्र के कर्मचारी उनके धान नहीं खरीद रहे हैं, जिनके नाम सूची में नहीं है।
इसलिए किसान धान को औने-पौने दामों पर धान बेचने को मजबूर है। अपर जिला सहकारी अधिकारी (एडीसीओ) केपी खरे ने बताया कि मोटे धान का खरीद मूल्य 1470 रुपये रखा गया है, जो पिछले साल से अधिक है। सभी खरीद केंद्रों को बारदाना और नमी नापने वाली मशीन उपलब्ध करा दी गई हैं। लेकिन राजस्व विभाग की ओर से किसानों की सूची नहीं आने से अभी तक धान खरीद शुरू नहीं हुई है। मंडी धान से पटने लगी है। एसएमआई अरुण रावत ने बताया कि उनके पास राजस्व विभाग ने कुछ किसानों की सूची भेजी है। उसी के आधार पर खरीद शुरू कर दी गई हैै। अभी तक मात्र 24 क्विंटल धान खरीदा गया है। मंडी में मोटा धान का भाव 1250 तक है।
किसान नेता सतनाम सिंह चीमा ने बताया कि प्रशासन ने ऑन लाइन से धान खरीद की घोषणा कर किसानों को गुमराह कर दिया है। किसान कैसे ऑन लाइन कर धान बेचने के लिए पंजीकरण कराएगा, इसकी किसानों को अब तक कोई जानकारी नहीं दी गई है। इसलिए किसान भ्रम की स्थिति में है और धान को औने पौने भाव में बेचने को मजबूर है। किसानों को ऑन लाइन खरीद की पूरी जानकारी दी जानी चाहिए थी।