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पोलैंड की युवती भारतीय संस्कृति से अभिभूत

Sat, 25 Feb 2017 12:38 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, किच्छा।
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भारतीय संस्कृति से अभिभूत - फोटो : अमर उजाला
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किच्छा। जहां एक ओर भारतीय युवक-युवतियां पश्चिमी देशों का रुख कर रहे हैं, वहीं पोलैंड निवासी पाउलीना सात साल से भारतीय संस्कृति, खेलों का पोलैंड में प्रचार-प्रसार कर रही हैं। पाउलीना ने जब भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में लकड़ी, गोबर के कंडों पर बना सरसों का साग, मक्के की खाई तो वह उसका स्वाद नहीं भूली।
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पोलैंड की राजधानी वारसा निवासी पाउलीना इन दिनों तीसरी बार माहभर के लिए भारत आईं हैं। वह इन दिनों किच्छा की आवास विकास कॉलोनी में ठहरी हैं। यहां उनकी चचेरी बहन इवा का विवाह सेवानिवृत्त कोतवाल चौधरी रामचरन सिंह के पुत्र शाकेंद्र सिंह से हुआ है। पाउलीना के पति पोलैंड की एक कार कंपनी में ऊंचे पद पर हैं।

उनके दो बच्चे हैं, जो स्कूल पढ़ते हैं। 13 दिन पहले जब पाउलीना यहां पहुंची तो अपनी बहन, जीजा के साथ एक विवाह समारोह में जाने से पहले उसने साड़ी पहनने की इच्छा जताई। पाउलीना ने जब बनारसी साड़ी पहनी तो बेहद खुश हुई। पाउलीना ने जब विवाह संस्कार में सात फेरे, हवन में आहूति देने, दुल्हन द्वारा दूल्हे के हाथ में फूल देने की रस्में देखी तो वह बहुत प्रभावित हुई।
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पाउलीना ने बताया कि उनके देश में अगर किसी विवाह में 100-150 मेहमान आ गए तो उसे बड़ा विवाह कहा जाता है, जबकि भारत में कई सौ लोग आकर जब दूल्हा-दुल्हन को आशीर्वाद देते हैं तो वह पल यादगार लगता है। पाउलीना बताती है कि वह अपने देश में होली, दीपावली, दशहरे, नवरात्रों पर कार्यक्रम आयोजित कर उनमें भारतवंशियों को भी बुलाती हैं।

बताया कि उन्होंने बुलंदशहर यूपी के एक गांव में जब गोबर के कंडे, लकड़ियों की आग पर बना सरसों का साग और मक्का की रोटी बनाती ऐसी मां को देखा जो अपने चार बच्चों को खाना खिला रही थी। बताया कि मक्का की रोटी, सरसों के साग का स्वाद यादगार बन गया। बताया कि जब वह पहली बार भारत आईं तो उसने यहां पर कैरमबोर्ड खेल देखा वह खेल इतना भाया कि उसने अपने देश में जाकर इसकी प्रतियोगिता करवाई।

यहां की संस्कृति, खेलकूद से बेहद प्रभावित हैं। पाउलीना भारतीय खेल, संस्कृति से संबंधित शिक्षा के विभिन्न स्कूलों और सामाजिक स्थानों पर वहां के वाशिंदों को देती हैं। पाउलीना ने बताया बचपन में भारतीय संस्कृति से संबंधित किताबें पढ़तीं थीं। धीरे-धीरे उनके मन में भारतीयों के प्रति लगाव बढ़ा। जब वह पहली बार भारत आईं तो कोलकाता, मुंबई, दिल्ली समेत कई शहरी, ग्रामीण इलाकों में लोगों का जीवन स्तर करीब से देखा। 
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