रुद्रपुर में ओवरलोडिंग बस में सफर करना मजदूर यात्रियों के गले की फांस बन गया है। जिनके पास आगे की यात्रा करने के लिए रुपये थे वह दूसरी बस से रवाना हो गए लेकिन जिनकी जेब ही बस का किराया देने में खाली हो गई, ऐसे बेबस यात्री महिला, बच्चों को लेकर रोडवेज बस अड्डे पर दिन और रात गुजारने के लिए मजबूर हो गए।
उनके मन में एक ही सवाल है कि आखिर कब पहुंचेंगे अपने घर.. हैरानी की बात है कि कार्रवाई के बाद इन यात्रियों की किसी भी महकमे ने सुध नहीं ली। रोडवेज प्रशासन ने रात गुजारने के लिए छत तो दी लेकिन मजदूरों के पास खाने तक को पैसे नहीं थे क्योंकि 800 रुपये किराया ही उनके दो दिन की कमाई के बराबर है। बस चालक और परिचालक पर सीज और चालानी कार्रवाई तो हो गई लेकिन गरीब यात्री बस इस इंतजार में बैठे रहे कि आखिर कब वह अपने गंतव्य को रवाना होंगे। एक तरह से इन यात्रियों पर गरीबी की दोहरी मार पड़ी है। पहले कम किराये का लालच देकर उन्हें भेड़ बकरियों की तरह 30 सीट वाली बस में ठूंस दिया गया और जब कार्रवाई हुई तो उन्हें तीन दिन तक अपने आशियाने से दूर रहना पड़ा।
तीन बस में इमरजेंसी एक्जिट तक नहीं
पैसे नहीं होने पर गुरुद्वारे के लंगर से मिटाई भूख
तीन दिन से रोडवेज परिसर में रह रहे बहराइच के यात्री यह सोच कर आए थे कि वह अगली सुबह जालंधर तक कैसे भी करके पहुंच जाएं तो वहां जाकर आराम से खाना खाएंगे लेकिन रुद्रपुर में कार्रवाई के बाद उन्हें गुरुद्वारे के लंगर में भूख मिटानी पड़ी। कुछ सेवक उन्हें तीन दिन तक भोजन उपलब्ध कराते रहे।