रुद्रपुर। दो एनएच की जद में आने से बर्बाद हो रहे रुद्रपुर शहर को बचाने की दिशा में राज्यपाल भी गंभीर हैं। इसमें हजारों व्यापारियों का चौपट होता कारोबार और शहर में होने वाली भारी टूटफूट का हवाला देते हुए राज्यपाल ने स्पष्ट किया है कि रुद्रपुर शहर कुमाऊं का प्रवेश द्वार है, लिहाजा इसे एनएच चौड़ीकरण की जद में आने से बचाया जाए।
28 मार्च को राज्यपाल की ओर से पीडब्ल्यूडी के अधीक्षण अभियंता को भेजी अभिरुचि की अभिव्यक्ति सूचना में कहा गया है कि रुद्रपुर शहर कुमाऊं क्षेत्र का प्रवेश द्वार, घनी आबादी का शहर होने के साथ ही यह एक महत्वपूर्ण व्यावसायिक केंद्र है।
वहीं यह ऊधमसिंह नगर जिले का एक अहम नगर निगम क्षेत्र भी है। जनसंख्या में लगातार बढ़ोतरी होने के कारण शहर का विकास भी तेजी से हो रहा है। इसलिए शहर को एक रिंग रोड की सख्त जरूरत है। इसलिए प्रस्तावित एनएच फोरलेन पर चाणक्या लॉ कॉलेज से पूर्व दिशा में एनएच 74 पर होकर एनएच 87 से जोड़ते हुए पंतनगर पत्थरचट्टा से पश्चिम दिशा में शहर से बाहर ही निकाला जा सकता है।
28 मार्च को राज्यपाल की जो सूचना पीडब्ल्यूडी के एसई को जो जारी हुई हैं, उस पर संबंधित विभाग की तैयारी स्पष्ट नहीं हो सकी है। अगर राज्यपाल की ओर से जारी सूचना पर एनएचएआई और जिला प्रशासन सहित कार्यदायी संस्था एकराय बनाते हुए रामपुर से काठगोदाम को जाने वाले एनएच 87 को शहर से बाहर ही निकालें तो फिर रुद्रपुर शहर भारी तोड़फोड़ से बच जाएगा।
इससे हजारों व्यापारियों का कारोबार भी प्रभावित होने से बच सकता है। शहर विधायक राजकुमार ठुकराल का भी कहना है कि एनएच चौड़ीकरण की जद में आने से प्रभावित हो रहे हजारों लोगों के कारोबार को बचाने के लिए वह इसका प्रस्ताव बनाते हुए इसे शासन में रखेंगे। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से भी बातचीत की जाएगी।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री तिलकराज बेहड़ भी चाहते हैं कि एनएच चौड़ीकरण के कारण शहर में होने वाली भारी टूटफूट से बचने के लिए पूर्व के सर्वे के आधार पर एनएच को किच्छा रोड से होकर बाहर से ही निकाला जाना चाहिए।