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Udham Singh Nagar News: बेकाबू कार ने ई-रिक्शा और बाइक को रौंदा, चालक के पैर कुचले

Tue, 21 Jul 2026 11:39 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
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रुद्रपुर। काशीपुर मार्ग पर तेज रफ्तार का कहर थम नहीं पा रहा है। अनियंत्रित कार ने पहले बाइक और फिर ई-रिक्शा को जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में ई-रिक्शा चालक के पैर कुचल गए और बाइक सवार भी गंभीर रूप से घायल हो गया।
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ग्राम धौलपुर स्थित पेट्रोल पंप के पास मंगलवार सुबह काशीपुर की ओर से आ रही तेज रफ्तार कार अचानक अनियंत्रित हो गई। चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका और पहले आगे चल रही बाइक को टक्कर मार दी। इसके बाद कार सामने से आ रहे ई-रिक्शा से जा भिड़ी। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार, बाइक और ई-रिक्शा तीनों क्षतिग्रस्त हो गए। हादसे में ई-रिक्शा चालक नरेश निवासी दुर्गा सिटी, जाफरपुर कार के नीचे फंस गए। उनके दोनों पैर बुरी तरह कुचल गए।
आसपास मौजूद लोगों ने कड़ी मशक्कत के बाद उन्हें कार के नीचे से बाहर निकालकर अस्पताल भिजवाया। बाइक सवार को भी गंभीर चोटें आई हैं जिसका अस्पताल में इलाज चल रहा है। सूचना पर दिनेशपुर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और तीनों वाहनों को कब्जे में लेकर जांच शुरू की। एसपी सिटी उत्तम सिंह नेगी ने बताया कि प्रथम दृष्टया हादसे का कारण कार की तेज रफ्तार और चालक का वाहन से नियंत्रण खोना प्रतीत हो रहा है। घायल ई-रिक्शा चालक और बाइक सवार को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
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पत्नी की सेवा से पैरों पर लौटा था पति... हादसे ने फिर छीनी खुशियां
कोविड के बाद जीबीएस बीमारी से ग्रसित हो गया था नरेश, तीन महीने पहले ही खरीदा था ई-रिक्शा
साक्षी सक्सेना
रुद्रपुर। कभी पत्नी की गोद के सहारे एक कमरे से दूसरे कमरे तक पहुंचने वाला नरेश तीन साल की लंबी जंग के बाद दोबारा अपने पैरों पर खड़ा हुआ था। परिवार की आजीविका संभालने के लिए तीन महीने पहले ही उसने ई-रिक्शा खरीदा था। जिंदगी फिर पटरी पर लौटने लगी थी लेकिन मंगलवार सुबह काशीपुर हाईवे पर तेज रफ्तार कार ने उसकी यह नई शुरुआत भी छीन ली।
दिनेशपुर के जाफरपुर निवासी नरेश वर्ष 2020-21 में चाऊमीन का ठेला लगाकर परिवार का गुजारा करते थे। कोविड काल के बाद वह गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) की चपेट में आ गए। बीमारी ने उनकी मांसपेशियों को इतना कमजोर कर दिया कि वह चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ हो गए। इलाज के लिए उन्हें ऋषिकेश एम्स में तीन महीने तक भर्ती रहना पड़ा लेकिन घर लौटने के बाद भी उनकी हालत में खास सुधार नहीं हुआ।
जब हर कोई नरेश के ठीक होने की उम्मीद खो चुका था, तब पत्नी यशोदा ने हार नहीं मानी। उन्होंने घर पर नियमित थेरेपी और दिन-रात सेवा जारी रखी। करीब तीन साल की अथक मेहनत और देखभाल के बाद नरेश फिर अपने पैरों पर खड़े हो सके।
जाफरपुर की सभासद सरिता चौधरी ने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए नरेश ने तीन महीने पहले ई-रिक्शा खरीदा था और उसे चलाकर पत्नी व दो छोटे बच्चों का पालन-पोषण कर रहे थे। मंगलवार सुबह हुए सड़क हादसे ने उनकी जिंदगी को फिर उसी मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया। परिजनों का कहना है कि हादसे में उनका एक पैर गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया है। संवाद

गोद में उठाकर कराती थी हर काम
जीबीएस से पीड़ित होने के बाद नरेश इतने कमजोर हो गए थे कि बिस्तर से उठ भी नहीं पाते थे। पत्नी यशोदा उन्हें गोद में उठाकर एक कमरे से दूसरे कमरे तक ले जाती थीं। वही उनकी थेरेपी करतीं और हर छोटी-बड़ी जरूरत का ख्याल रखती थीं। उसी सेवा और समर्पण ने नरेश को दोबारा चलना सिखाया था। दंपती की पांच वर्ष की बेटी और एक वर्ष का बेटा है जिनके भविष्य की चिंता एक बार फिर परिवार के सामने खड़ी हो गई है।
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