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गोलीकांड की 22 वीं बरसी पर शहीदों को किया या

Fri, 02 Sep 2016 12:48 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो खटीमा
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खटीमा में शहीद दिवस पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करे पूर्व सीएम भगत सिंह कोश्यारी व विधायक गण - फोटो : अमर उजाला
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 उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान एक सितंबर 1994 को हुए गोलीकांड में शहीद हुए राज्य आंदोलनकारियों की 22 वीं बरसी पर क्षेत्र की जनता और जनप्रतिनिधियों ने शहीद स्मारक पहुंचकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। वक्ताओं ने कहा कि आज भी शहीदों के सपनों का उत्तराखंड नहीं बना है। उन्होंने शहीदों के सपनों का राज्य बनाने का संकल्प लिया।
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संजय रेलवे पार्क स्थित शहीद भगवान सिंह सिरौला, प्रताप सिंह मनौला, गोपीचंद, धर्मानंद भट्ट, रामपाल, परमजीत सिंह, सलीम अहमद के स्मारक पर पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी, उक्रांद नेता काशीसिंह ऐरी, विधायक पुष्कर सिंह धामी, विधायक डा. प्रेम सिंह राणा सहित तमाम लोगों ने श्रद्धांजलि अर्पित की। पूर्व सीएम एवं सांसद कोश्यारी ने कहा कि हमें उत्तराखंड राज्य को उन्नत एवं विकसित राज्य बनाना है।

उन्होंने शहीद स्मारक के सौंदर्यीकरण के लिए पांच लाख रुपये की घोषणा की। उक्रांद नेता ऐरी खटीमा, मसूरी, नैनीताल, मुजफ्फरनगर, रामपुर तिराहे पर राज्य आंदोलनकारियों ने जो शहादत दी आज भी शहीदों के सपनों का उत्तराखंड नहीं बन पाया है। इस दौरान कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे शेर सिंह दिगारी ने राज्य आंदोलनकारियों की समस्याओं का मांगपत्र कोश्यारी को सौंपा।
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अन्य वक्ताओं में विधायक धामी, डा. राणा, पूर्व विधायक गोपाल सिंह राणा, ब्लाक प्रमुख दान सिंह राणा, प्रकाश तिवारी, महेश जोशी, देवेंद्र चंद, राजू जुनेजा, नंदन सिंह खड़ायत, रामू जोशी, हरीश बोरा, रंदीप भाई पोखरिया, गणेश ठकुराठी, दयाकिशन कलोनी, हरीश जोशी ने अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर अरुण सक्सेना, बाबी राठौर, नासिर खान, महेंद्र दिगारी, गोपाल बोरा, हिमांशु बिष्ट, जोहार सिंह पोखरिया, ठा. भगवान सिंह, दानबहादुर सिंह आदि थे। कार्यक्रम का संचालन अमित कुमार पांडे ने किया।

खटीमा। राज्य आंदोलनकारियों की उपेक्षा व शहीद स्मारक के लिए आवंटित ढाई बीघा जमीन पर मात्र चौहद्दी किए जाने के विरोध में आंदोलनकारियों ने विशाल धरना प्रदर्शन कर राष्ट्रपति व मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भेजा। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि 15 सितंबर तक उनकी मांगे पूर्ण नहीं की गयी तो वह बड़े आंदोलन को बाध्य होंगे। इसमें अगर कानून व्यवस्था बिगड़ी तो उसके लिए राज्य सरकार व स्थानीय प्रशासन जिम्मेदार होगा।
आंदोलनकारियों ने कहा कि शहीद स्मारक के लिए आवंटित जगह पर चार वर्ष बीतने के बाद भी शहीद स्मारक नहीं बन पाया है। जिसके लिए राज्य की सरकार व स्थानीय जनप्रतिनिधि जिम्मेदार हैं। आंदोलनकारियों ने कहा कि आज भी तहसील में आंदोलनकारियों की फाइलें चिन्हींकरण के लिए धूल फांक रही हैं। अध्यक्षता गणेश ठकुराठी व संचालन भगवान जोशी ने किया। इस अवसर पर डा. ललित सिंह, होशियार सिंह जेठी, नवीन भट्ट, शिवशंकर भाटिया, दयाकिशन
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