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जसपुर में ‘ऑपरेशन 555 पतरामपुर’ शुरू 

Fri, 12 Oct 2018 12:01 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/ऊधमसिंह नगर
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जसपुर में मिसाइलों को निकालने के लिए खुदाई करता बम निरोधक दस्ता। - फोटो : अमर उजाला
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बाराबंकी (लखनऊ) से आई मध्य कमान सेना की यूनिट ने पतरामपुर चौकी परिसर में पिछले 14 वर्षों से दबीं 555 मिसाइलों को नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इन मिसाइलों को हजीरों गांव के फीका नदी क्षेत्र में नष्ट किया जाना है। सेना की टीम को परिवहन सहायता एवं अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए जिला पुलिस का बम निरोधक दस्ता और अन्य कर्मी तैनात किए गए हैं। एएसपी डॉ. जगदीश चंद्र के अनुसार सुबह कुछ मिसाइलें निकाली गईं लेकिन बाद में बारिश होने पर सेना को काम बंद करना पड़ा।

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काशीपुर की एसजी स्टील फैक्ट्री में ईरान से आयात स्क्रैप में बड़ी तादाद में मिसाइलें भी आ गई थीं। 21 दिसंबर 2004 को फैक्ट्री में स्क्रैप गलाते समय मिसाइल फटने से एक श्रमिक की मौत हो गई थी, जबकि कई मजदूर घायल हो गए थे। मौके पर मिलीं 555 मिसाइलों को प्रशासन ने एहतियातन पतरामपुर चौकी परिसर में दफन कर दिया था। शासन के पत्र के संदर्भ में बृहस्पतिवार को सेना के मध्य कमान से कैप्टन विकास मलिक के नेतृत्व में टीम पतरामपुर पहुंची। 

टीम ने खुदाई स्थल की नाकेबंदी के लिए एक प्लाटून पीएसी तैनात की थी। यहां से मिसाइलें निकालकर उनको हजीरों गांव में फीका नदी क्षेत्र में नष्ट किया जाएगा। इस कार्य के लिए जिला पुलिस एवं प्रशासन की ओर से परिवहन सहायता के अलावा मिट्टी के बैग, तार और अन्य जरूरी सामग्री उपलब्ध कराई गई। दमकल की टीम को भी वहां तैनात किया गया है। मिसाइलों को नष्ट करने की प्रक्रिया अगले एक सप्ताह तक चलेगी। इस दौरान वहां एएसपी डॉ. जगदीश चंद्र, एसडीएम दयानंद सरस्वती, कोतवाल अबुल कलाम, तहसीलदार जोगा सिंह आदि थे। 
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सेना की टीम में ये हैं शामिल 
कैप्टन विकास मलिक, नायब सूबेदार केबी भोसले, एचसी सेंडगे एआर, बीजी पाटिल, लांसनायक केलरे दीपक, सेपर पंकज साल्वी, कैलाश व संजीत कुमार, हवलदार रणपिसे डीडी और नायक महेंद्र सिंह। 

भ्रम के चलते दूसरी जगह कर दी खुदाई 
जसपुर। पतरामपुर चौकी में दबाई गई मिसाइलों का स्थल चयनित करने के लिए बम निरोधक दस्ते की टीम ने मिसाइल खोजने के लिए गलत स्थान पर खुदाई कर दी। दरअसल 10 वर्ष साल पहले जिन पुलिस अधिकारियों व कर्मियों की मौजूदगी में मिसाइलें दबाई गई थी, उनका स्थानांतरण हो चुका है जबकि कई सेवानिवृत्त भी हो गए है। सटीक स्थल की जानकारी जुटाने के लिए पुलिस कर्मी तत्कालीन पुलिस अधिकारियों को फोन मिलाते रहे। बाद में जानकारी मिलने पर सेना की टीम ने खुदाई शुरू की। 

 
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