काशीपुर। चेक बाउंस के मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट सिविल जज (जू.डि.) ने दोषी को एक लाख दस हजार रुपये जुर्माना व एक माह के साधारण कारावास की सजा सुनाई है।
गिरीताल निवासी देवेंद्र कुमार ने बताया कि ग्राम मिस्सरवाला निवासी मो. रिजवान से उसकी जान-पहचान थी। किसी जरूरी काम के नाम पर रिजवान ने उनसे दिसंबर 2018 में एक लाख रुपये मांगे थे। बिना किसी ब्याज के उन्होंने गवाह के सामने रुपये दे दिए। उसने छह महीने में रुपये लौटाने की बात कही थी। एक साल बाद भी जब उसने रुपये नहीं लौटाए, तब उन्होंने उससे रुपये की मांग की। उसने आर्थिक तंगी का हवाला देकर एक-दो महीने का और समय मांगा।
समय बीतने के बाद जब दोबारा रुपये मांगे तो उसने एक लाख का चेक दे दिया। बैंक में लगाने पर चेक बाउंस हो गया। इसके बाद उन्होंने रिजवान के खिलाफ केस दर्ज कराया। न्यायिक मजिस्ट्रेट सिविल जज (जू.डि.) करिश्मा डंगवाल ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद मो. रिजवान को अपराध के लिए दोषसिद्ध करते हुए एक लाख 15 हजार रुपये के जुर्माने और एक माह का साधारण कारावास की सजा सुनाई। ब्यूरो
चेक बाउंस के दोषी को तीन माह की सजा, जुर्माना भी लगा
काशीपुर। चेक बाउंस के दोषी को अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट/सिविल जज (सीडि) पायल सिंह की अदालत ने तीन माह के कारावास और दो लाख पांच हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया है।
मोहल्ला पक्काकोट निवासी सिमरन ने न्यायालय में धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम के तहत परिवाद दायर किया। इसमें कहा कि अशरफी लाल उसके मोहल्ले के ही निवासी हैं और उनके पारिवारिक संबंध हैं। अशरफी लाल ने सिमरन से 11 दिसंबर 2020 को एक लाख 80 हजार रुपये उधार लिए थे। उन्होंने 11 जून 2021 तक उक्त राशि वापस करने का समय मांगा था। इसके एवज में अशरफी लाल ने दो चेक जारी किए।
समय पूरा होने पर रकम वापस मांगी तो उसने दिए गए दो चेकों के माध्यम से रकम लेने को कहा। भुगतान के लिए जब चेकों को बैंक में लगाया तो वह खाते में रकम न होने पर अनादरित हो गए। 15 दिसंबर 2022 को पुलिस को तहरीर दी गई तो अशरफी लाल ने चौकी में आकर एक लाख 80 हजार रुपये का चेक दिया लेकिन यह भी अनादरित हो गया। न्यायालय ने अधिवक्ताओं की बहस, पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन कर अशरफी लाल को दोषसिद्ध करते हुए तीन माह के साधारण कारावास की सजा सुनाई। साथ ही दो लाख पांच हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। ब्यूरो