रुद्रपुर। विधानसभा चुनाव में ड्यूटी निभाने वाले अधिकतर अधिकारी, कर्मचारी चुनाव खत्म होने के बाद थकान उतारने के लिए घरों पर ही रहना मुनासिब समझ रहे हैं। 15 फरवरी को मतदान के बाद डीएम के आदेश के अनुसार अधिकारियों को शुक्रवार को दफ्तरों में पहुंच कर काम संभालना था, लेकिन शुक्रवार को अधिकतर अधिकारियों ने दफ्तरों में पहुंचने के बजाए घर पर ही आराम करना ठीक समझा।
विधानसभा चुनाव के कारण अधिकतर अधिकारी, कर्मचारी को निर्वाचन की जिम्मेदारी दी गई थी। शुक्रवार को अमर उजाला ने सुबह 11 बजे विकास भवन में पहुंच कर अधिकारियों के कार्यालयों का जायजा लिया। सबसे पहले जिला पूर्ति अधिकारी विपिन पांडे के कार्यालय पहुंचे तो 11 बजे तक पूर्ति अधिकारी कार्यालय से नदारद थे। वहीं जब कार्यालय में तैनात कर्मचारियों से उनके अधिकारी के न होने के बारे में पूछा गया तो जवाब नहीं मिला।
इसके बाद विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी के कार्यालय पहुंचे तो और बुरा हाल था। विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी के साथ ही उनके सहयोगी कर्मचारी भी कार्यालय से नदारद मिले, जबकि भूमि मामले को लेकर परेशान लोग अधिकारी को खोज रहे थे। विकास भवन की दूसरी मंजिल पर बने अधिकारियों के कार्यालयों में भी कमोबेश यही स्थिति थी। करीब 12:30 बजे के बाद भी सहायक निदेशक ब्रजेश सिंह कार्यालय में नहीं थे।
वहीं कृषि भूमि संरक्षण अधिकारी अमित कुमार, ललित चंद्र आर्या भी कार्यालय में नहीं मिले। करीब एक बजे जिला बचत अधिकारी पल्लवी बिष्ट, मुख्य कृषि अधिकारी पीके सिंह का कार्यालय भी खाली था। विकास भवन में बैठने वाले सीडीओ आलोक कुमार पांडे को अधिकारियों की अनुपस्थिति का नहीं पता था। उपलब्ध कर्मचारी भी अधिकारियों की लोकेशन नहीं बता सके।
रुद्रपुर। अधिकतर कार्यालयों में अधिकारियों के न बैठने से आम लोग प्रभावित हो रहे हैं। शायद अधिकारियों को इसका अंदाजा नहीं है। सड़क चौड़ीकरण के मामले में शहर के अन्य लोगों के मकानों के साथ दूरदराज क्षेत्र के लोगों के मकान हाइवे की जद में आ रहे हैं। इसी को लेकर भगवानपुर से लक्ष्मी विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी डीपी सिंह से मिलने आई थीं, लेकिन अधिकारी के न मिलने के कारण लक्ष्मी की आंखों में आंसू आ गए। कहने लगीं जब गरीबों की सुध नहीं लेते तो अधिकारी क्यों बनते हैं। वहीं बाजपुर से आए स्वराज सिंह को भी अधिकारियों की लापरवाही से बहुत शिकायत है।