कृषि विज्ञान केंद्र में खेत में लगाई गई स्मार्ट मशीन, जो बताएगी कि खेत में कौन सा कीट है।
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कीटनाशक का अनावश्यक छिड़काव करने के बजाय अब संख्या के आधार पर फैसला लेने में स्मार्ट मशीन मदद करेगी। खेतों में यह मशीन कैमरे की मदद से कीटों की पहचान और गिनती करेगी। इसके आधार पर किसानों को मोबाइल ऐप और एसएमएस के जरिये संभावित प्रकोप की जानकारी दी जाएगी ताकि जरूरत के अनुसार कीटनाशक का इस्तेमाल किया जा सके।
सोलर ऊर्जा से चलने वाली इस मशीन में अल्ट्रावायलेट लाइट, फेरोमोन और स्टिकी ट्रैप की मदद से कीटों को आकर्षित कर पकड़ा जाता है। इसके बाद मशीन में लगा हाई-रिजॉल्यूशन कैमरा उनकी पहचान और संख्या का आकलन करता है। एकत्रित जानकारी के आधार पर संबंधित क्षेत्र में फसल पर कीटों के संभावित प्रकोप का अलर्ट जारी किया जाता है। इससे किसानों को समय रहते कीटों की स्थिति समझने और अनावश्यक छिड़काव से बचने में मदद मिल सकती है।
मित्र कीटों को बचाने में मिलेगी मदद
खेतों में मौजूद सभी कीट फसलों के लिए नुकसानदायक नहीं होते। कई मित्र कीट हानिकारक कीटों को खाकर उनकी संख्या नियंत्रित करते हैं। बिना पहचान के कीटनाशक का छिड़काव करने से ऐसे उपयोगी कीट भी नष्ट हो सकते हैं, जिससे खेत में प्राकृतिक जैविक नियंत्रण प्रभावित होता है। स्मार्ट मशीन से कीटों की पहचान और उनकी संख्या की जानकारी मिलने पर किसान छिड़काव का फैसला अधिक सटीक तरीके से ले सकेंगे।
स्कैननेक्स्ट कंपनी और विभाग के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत कृषि विज्ञान केंद्र में मशीन को परीक्षण के तौर पर लगाया गया है। ट्रायल के दौरान इसकी निगरानी क्षमता और उपयोगिता का आकलन किया जा रहा है। परीक्षण के नतीजे सफल रहने पर इसे पूरे जिले में लगाने की योजना है। - एसके शर्मा, प्रभारी, कृषि विज्ञान केंद्र