खटीमा। नेपाल से लगी सीमा के एक मात्र 30 शय्या वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में क्षेत्र की जनता को नेत्र चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं है। आठ वर्ष पूर्व यहां के नेत्र चिकित्सक का अन्यत्र स्थानांतरण हुआ था। सीएचसी में डेढ़ साल से दंत चिकित्सक का पद भी रिक्त पड़ा है। दंत एवं नेत्र रोगीयों को मजबूरन निजी अस्पतालों में जाना पड़ता हैं।
प्रतिदिन लगभग साढ़े चार सौ ओपीडी वाले इस सीएचसी में नेत्र एवं दंत चिकित्सा विभाग बंद पड़े हैं। लगभग आठ वर्ष पूर्व यहां के नेत्र चिकित्सक का अन्यत्र स्थानांतरण हुआ था। जबकि सीएचसी में नेत्र चिकित्सक एवं दंत चिकित्सक नहीं होने की वजह से साधन विहीन गरीब रोगी उपचार के लिए दर-दर भटकते हैं।
उन्हें यूपी के बरेली, पीलीभीत के अलावा लगभग 100 किमीद दूर हल्द्वानी, रुद्रपुर के अस्पतालों में उपचार कराना पड़ता है। यहां चलने वाले निजी अस्पतालों में महंगा उपचार आम रोगी के बूते की बात नहीं है। अस्पताल सूत्रों की मानें तो यहां प्रतिदिन 100 से 150 नेत्र एवं दंत रोगी उपचार के लिए पहुंचते हैं।
यहां तैनात तीन स्टाफ नर्सों में दो का स्थानांतरण होने के बाद एक को यहां भेजा गया है। सीएचसी अधीक्षक सुनीता रतूड़ी ने बताया कि अस्पताल में नेत्र सहायक तैनात हैं, जबकि नेत्र एवं दंत चिकित्सकों के रिक्त चल रहे पदों की जानकारी कई बार उच्चाधिकारियों को दी जा चुकी हैं।