रुद्रपुर। जिला अस्पताल में माइक्रो बायोलॉजी विशेषज्ञ की तैनाती न होने से बैक्टीरिया, वायरस, कवक और परजीवियों का अध्ययन प्रभावित हो रहा है।
वर्ष 1995 में बने यूएस नगर जिले में वर्ष 2006 से व्यवस्थित ढंग से जिला अस्पताल का संचालन हुआ। अस्पताल की स्थापना के साथ ही माइक्रो बायोलॉजी विशेषज्ञ का पद सृजित किया गया लेकिन तैनाती नहीं हुई। उम्मीद थी कि देर-सबेर इस पद पर तैनाती होगी और इसका लाभ जिले के लोगों को मिलेगा। ऐसा हो नहीं पाया। माइक्रो बायोलॉजी विशेषज्ञ का पद आज तक रिक्त है। संवाद
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क्या है माइक्रो बायोलॉजी विशेषज्ञ
माइक्रो बायोलॉजी डॉक्टर बैक्टीरिया, वायरस, कवक (फंगस) और परजीवियों के अध्ययन और उनसे होने वाले रोगों के निदान के विशेषज्ञ होते हैं। बीमारियों को रोकने, सही जांच रिपोर्ट देने और उचित इलाज की सलाह देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वह बीमारियों को रोकने, सही जांच रिपोर्ट देने और उचित इलाज की सलाह देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। रक्त, मूत्र, कफ के नमूनों की जांच कर पता लगाते हैं कि बीमारी किस वायरस या बैक्टीरिया के कारण हुई है।
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दवा कौन सी कारगर, यह भी करते हैं तय
माइक्रो बायोलॉजी विशेषज्ञ मरीजों पर कौन-सी दवा या एंटीबायोटिक सबसे असरदार होगी इसकी जांच (कल्चर और सेंस्टिविटी टेस्ट) करते हैं ताकि दवाओं के गलत इस्तेमाल को रोका जा सके।
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जिले में विशेषज्ञ चिकित्सकों के रिक्त पदों पर तैनाती के लिए स्वास्थ्य महानिदेशालय को लगातार प्रस्ताव भेजे जाते हैं। जिला अस्पताल में माइक्रो बायोलॉजी विशेषज्ञ का पद रिक्त होने की जानकारी महानिदेशालय के संज्ञान में है। -डॉ. केके अग्रवाल, सीएमओ यूएस नगर