सिडकुल के जहरीले पानी की समस्या उद्योगपतियों व क्षेत्र के लिए नासूर बनती जा रही है। वहीं, पर्यावरण के लिए भी यह जहरीला पानी घातक सिद्ध हो रहा है। जल प्रदूषण रोकने के लिए पर्यावरण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, केजीसीसीआई और एसएसआईडब्ल्यूए के उद्योगतियों की बैठक हुई।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के सदस्य ओम श्रीवास्तव ने कहा कि 130 में से 38 ड्राई व वेट फैक्ट्री सीईटीपी से जुड़ी हैं। अन्य कंपनियां भी जल्द सीईटीपी से जुड़ें। उन्होंने पीसीबी और एल्डिको को कहा कि वे कंपनियों को सीईटीपी से जुड़ने का नोटिस जारी करें।
बृहस्पतिवार शाम चार बजे सिडकुल के एवरग्रीन मोटल में आयोजित बैठक में एनजीटी सदस्य श्रीवास्तव ने कहा कि सिडकुल की कोई भी फैक्ट्री गंदा पानी नहर, नदी, नाले व ग्राउंड में न छोड़ें। कहा कि जो फैक्ट्री सीईटीपी से नहीं जुड़ेगी, उसको बंद करने का नोटिस जारी किया जाएगा।
उन्होंने पर्यावरण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व एल्डिको को सीईटीपी प्लांट से कनेक्ट करने के लिए नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। केजीसीसीआई के अध्यक्ष अशोक बंसल ने कहा कि एल्डिको सभी उद्योगों को सीईटीपी से जोड़ने के लिए कंसल्ट करे। एसएसआईडब्ल्यूए के अध्यक्ष सुरेश कुमार ने कहा कि जिंदल सीईटीपी (कॉमन इंफ्लूएंट ट्रीटमेंट प्लांट) को दो एमएलडी पानी देने पर सहमति बनी थी। जिसमें 38 कंपनियां डेढ़ एमएलडी पानी दे रही हैं।
पांच सौ केएल पानी और दिया जाना है। इसके लिए कंपनियों को सीईटीपी से जुड़ने की अपील की गई है। वहां पर केजीसीसीआई के पूर्व चेयरमैन दरबारा सिंह, एसडीएम एपी बाजपेयी, सिडकुल के क्षेत्रीय प्रबंधक गौरव चटवाल, पीसीबी के क्षेत्रीय प्रबंधक एसपी सिंह, एल्डिको के क्षेत्रीय प्रबंधक संदीप चावला, जिंदल ट्रीटमेंट प्लांट कंपनी के डायरेक्टर राकेश ग्रोवर, सिंचाई ईई संजय राज, बालाजी कंपनी के वीके अग्रवाल, भरत सहगल, आरके सक्सेना, केएन झा, सुब्रत मंडल, इंद्रजीत दुबे, देवेंद्र गुप्ता, एनएस बिष्ट आदि थे।
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