विधानसभा चुनाव के लिए खड़े हुए प्रत्याशी सोशल मीडिया पर आचार संहिता की धज्जियां उड़ा रहे हैं। प्रत्याशी सोशल मीडिया पर बिना अनुमति धुआंधार प्रचार कर रहे हैं। जबकि जिले में 80 प्रत्याशियों में से सिर्फ एक निर्दलीय प्रत्याशी ने अनुमति ली है।
चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार विधानसभा चुनाव में कोई भी प्रत्याशी बिना प्रशासन की अनुमति के सोशल मीडिया पर प्रचार प्रसार नहीं कर सकता है। सोशल मीडिया पर प्रचार करने से पहले प्रत्याशियों को मीडिया संचार और प्रमाणन समिति (एमसीएमसी) में अपने पत्र देकर चुनाव चिन्ह का पंजीकरण कराकर अनुमति लेनी होती है। लेकिन फिलहाल जिले में किसी भी प्रत्याशी ने इसी तवज्जो नहीं दी है। प्रत्याशी और उनके समर्थक फेसबुक और व्हाट्सएप पर धुआंधार चुनाव प्रचार कर रहे हैं। यही नहीं कुछ प्रत्याशियों के समर्थक तो आपत्तिजनक प्रचार करने से भी बाज नहीं आ रहे हैं, जिससे चुनाव के दौरान माहौल खराब होने की आशंकाएं भी बनी हुई हैं। लेकिन इस मामले में प्रशासन लापरवाह बना हुआ है। प्रशासन अभी तक सिर्फ चेतावनी ही जारी करने तक ही सीमित है। एमसीएमसी की रिपोर्ट के अनुसार जिले भर के 80 प्रत्याशियों में से सिर्फ रुद्रपुर विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी मनप्रीत सिंह ने पंजीकरण कराया है। यह हाल तब है जब डीएम रोजाना बैठक में आचार संहिता का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई करने की बात कह रहे हैं। वहीं एमसीएमसी की मानीटरिंग करने वाले जिला सूचना अधिकारी बीसी तिवारी ने बताया कि अभी उन्हें सिर्फ एक निर्दलीय प्रत्याशी का ही आवेदन प्राप्त हुआ है।
तो क्या प्रत्याशी शुल्क से बचने के लिए नहीं कराते पंजीकरण
रुद्रपुर। एमसीसी मीडिया संचार और प्रमाणन समिति की नियमों के मुताबिक सोशल मीडिया पर प्रचार प्रसार करने वाले प्रत्याशियों को पंजीकरण कराने के बाद सरकारी शुल्क देना होता है। वहीं प्रचार में विज्ञापन एजेंसियों का सहारा लेने वाले प्रत्याशियों को भी शुल्क जमा करना होता है। एमसीएमसी का यह शुल्क फेसबुक पेज, व्हाट्सएप ग्रुप के अनुसार तय होता है। जो न्यूनतम 60 रुपए से लेकर 25 हजार रुपए तक है।