गूलरभोज रेलवे स्टेशन पर ट्रेन में चढ़ते-उतरते यात्री।
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ब्राडगेज लाइन होने के बाद गाड़ियों की संख्या तो बढ़ गई, लेकिन सुविधाओं की संख्या नहीं बढ़ी। विभाग के अनुसार इस स्टेशन से रोजाना करीब दस हजार का राजस्व मिलता है। यात्रियों के अनुसार यहां उनको दस सुविधाएं भी नसीब नहीं हैं। शुक्रवार को स्टेशन पर मंडल महाप्रबंधक राजीव अग्रवाल के सालाना निरीक्षण के दौरान यहां के यात्रियों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
तराई में सबसे पुराने स्टेशनों में शुमार गूलरभोज रेलवे स्टेशन सुविधाओं में काफी पिछड़ गया है। 1925 में अंग्रेजों ने यहां स्टेशन की स्थापना की थी। भारतीय रेल विभाग ने 75 साल बाद छोटी लाइन हटाकर ब्राडगेज लाइन बिछाई। इसके बाद गाड़ियों की संख्या तो बढ़ी, लेकिन सुविधाएं नहीं बढ़ पाई।
इससे रोजाना सफर करने वाले यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्टेशन में प्लेटफार्म के नीचा होने के कारण बुजुर्ग, दिव्यांग और बच्चों को गाड़ी में चढ़ने-उतरने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। स्टेशन में यात्रियों के लिए शैड और वाटर कूलर की व्यवस्था नहीं है।
स्टेशन में गूलरभोज से बाहर जाने के लिए रिजर्वेशन नहीं होता। लंबी दूरी की गाड़ियों के नहीं रूकने से यात्रियों को इनकी सुविधा नहीं मिल पा रही है। कई बार विभाग से लिखित शिकायत करने के बावजूद ने अभी तक इन समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया है। शुक्रवार को मंडल महाप्रबंधक राजीव के होने वाले निरीक्षण से लोगों को इन समस्याओं के समाधान की उम्मीद जगी है।