एनजीटी द्वारा गठित न्यायाधीश अरुण टंडन की अध्यक्षता वाली समिति ने दूसरे दिन भी रामनगर और बाजपुर रोड स्थित फैक्ट्रियों का निरीक्षण कर जानकारी ली। इस दौरान लगभग सभी फैक्ट्रियों के पानी के नमूने भी लिए गए। टीम अपनी रिपोर्ट एनजीटी को सौंपेगी।
बुधवार को टीम ने रामनगर रोड स्थित शिवांगी क्राफ्ट, बनवारी और विश्वकर्मा पेपर मिल का निरीक्षण किया। इस दौरान टीम ने फैक्ट्रियों के गंदे पानी को साफ करने वाले ईटीपी प्लांट (औद्योगिक उत्प्रवाह शुद्धिकरण संयंत्र) को देखा। साथ ही रामनगर रोड पर ही पश्चिम दिशा में बहने वाले बहल्ला नाले का निरीक्षण किया। टीम ने देखा कि उद्योगों द्वारा कितना साफ पानी नाले में छोड़ा जा रहा है।
इसके बाद टीम ने बाजपुर रोड स्थित चीमा पेपर मिल, मल्टीवाल पेपर मिल की दोनों यूनिटों का भी निरीक्षण किया। टीम ने लगभग सभी फैक्ट्री से पानी के नमूने भी लिए। पूरी प्रक्रिया के दौरान वीडियोग्राफी की गई। बता दें कि रामपुर निवासी डॉ. तंजीन फातीमा ने वर्ष 2017 में एनजीटी में शिकायत कर कहा था कि उत्तराखंड के काशीपुर में कोसी नदी किनारे स्थित उद्योगों से प्रदूषित पानी से रामपुर यूपी के कई क्षेत्र प्रभावित है।
प्रदूषित पानी पीने से कई गांव के लोग बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं। जिसके बाद कोसी व कोसी की सहायक नदियों के किनारे स्थित उद्योगों के निरीक्षण के लिए एनजीटी ने टीम का गठन किया है। टीम में नमामी गंगे के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. बीएस मथुरिया, सीपीसीबी के सचिव डॉ. प्रशांत, पीसीबी उत्तराखंड पर्यावरण अभियंता डॉ. अंकुर कंसल, पीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी सुभाष पवार, एई राकेश कंडारी, तहसीलदार वीसी पंत समेत अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद थे।