निजी अस्पताल में भर्ती नवजात गौरी को देहरादून के बाल शिशु गृह में भेज दिया गया है। बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष ने पुलिस और अस्पताल में कागजी कार्रवाई पूरी की। दो पुलिसकर्मी और एक अस्पताल स्टॉफ बच्ची को लेकर शिशु गृह रवाना हो गए। एक पखवाड़े से भर्ती गौरी का वजन 130 ग्राम बढ़ा है और वह पूरी तरह से स्वस्थ है। दिलचस्प बात है कि जिस बच्ची को अपनों से बेरहमी मिली, उसे परायों से भरपूर प्यार भी मिला। दरअसल चार अगस्त की रात लावारिस मिलने के बाद नवजात को कृष्णा अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती किया गया था।
एनआईसीसीयू वार्ड में भर्ती नवजात का उपचार कर रहे बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आनंद मोहन ने बच्ची का नाम गौरी रखा था। शुरुआत में बच्ची को पीलिया और इंफेक्शन की शिकायत थी, जो उपचार के बाद ठीक हो गई थी। बृहस्पतिवार को जिला बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष डॉ. रजनीश बत्रा ने सीओ कार्यालय और कोतवाली पहुंचकर कागजी कार्यवाही पूरी की। अस्पताल पहुुंचने पर डाक्टरों ने रजनीश को डिस्चार्ज स्लिप देने के बाद बच्ची को सौंप दिया।
डॉ. बत्रा ने बताया कि बच्ची को केदारपुरम देहरादून स्थित शिशु गृह में भेजा गया है। बच्ची के साथ एक पुरुष, एक महिला कांस्टेबल के साथ ही अस्पताल के एक कर्मचारी को भेजा गया है। बच्ची पूरी तरह से ठीक है। डॉ. आनंद मोहन ने बताया कि जब बच्ची अस्पताल लाई गई थी तो उसका वजन दो किलो 90 ग्राम था। वर्तमान में उसका वजह दो किलो 220 ग्राम है। वहां एमडी डॉ. मयंक अग्रवाल, प्रदीप चौधरी, डॉ. मोलश्री अग्रवाल आदि थे।
गौरी की कलाई में बांधी राखी
अस्पताल के एनआईसीयू वार्ड में भर्ती नवजात के साथ वार्ड के स्टाफ ने रक्षाबंधन का त्यौहार भी मनाया। स्टाफ नर्स ने बच्ची की कलाई में धागा बांधा और उसके बेहतर भविष्य के लिए दुआ की। मौजूद स्टाफ ने कहा कि बच्ची को अच्छा परिवार मिले, जहां इसकी बेहतर परवरिश हो।
गौरी गई तो खुशी के साथ उदासी भी
करीब 14 दिनों तक बच्ची की देखभाल करने वाले स्टाफ का उससे आत्मीय लगाव हो गया था। जब बच्ची गई तो स्टाफ के चेहरे पर उदासी के भाव रहे। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आनंद मोहन ने बताया कि बच्ची की देखरेख करते हुए वार्ड के स्टाफ का उससे लगाव हो गया था। स्टाफ को इसकी खुशी थी कि बच्ची की अच्छी देखभाल हो सकेेगी, लेकिन उदासी इसलिए थी कि वे उनसे दूर जा रही है। वहां तनुजा, प्रमिला, दीपक, मनोज, राहुल आदि थे।