रुद्रपुर। नया शिक्षा सत्र शुरू होने से पहले निजी प्रकाशकों की मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए शिक्षा विभाग सतर्क हो गया है। विभाग ने निजी स्कूल संचालकों से अनिवार्य रूप से एनसीईआरटी की पुस्तकों को पाठ्यक्रम में शामिल करने को कहा है। सीईओ अशोक सिंह ने बताया कि मनमानी करने पर विभाग निजी विद्यालयों की एनओसी रद्द करेगा।
ऊधम सिंह नगर में इस वर्ष विभिन्न विषयों की करीब 12 लाख एनसीईआरटी पुस्तकों की जरूरत पड़ सकती है। जिले में निजी प्रकाशकों, पुस्तक विक्रेताओं व कुछ निजी विद्यालयों की मिलीभगत से सभी बच्चों को एनसीईआरटी की पुस्तकें उपलब्ध कराना शिक्षा विभाग के लिए चुनौती बना हुआ है।
बता दें कि बीते वर्ष अप्रैल में रुद्रपुर मुख्य बाजार में पुस्तकों की दुकानों पर निजी प्रकाशकों की किताबें बिकने की सूचना मिलने पर कुछ व्यापारियों ने शिक्षा विभाग व प्रशासन की टीम को बंधक बना लिया था। मामले में शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने विद्यालयी शिक्षा परिषद व सीबीएसई से मान्यता प्राप्त विद्यालयों में पढ़ रहे बच्चों के अभिभावकों से महंगी किताबें खरीदने का दबाव वालों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने की अपील की थी।
सीईओ सिंह ने बताया कि इस वर्ष सरकार की गाइड लाइन के अनुसार विद्यालयों में एनसीईआरटी की ही पुस्तकें पढ़ाई जाएंगी। जिन विषयों की किताबें एनसीईआरटी में उपलब्ध नहीं होगी, उनके समकक्ष मूल्य की निजी पुस्तकों की किताबें लगायी जा सकती हैं लेकिन महंगी किताबें किसी भी कीमत पर नहीं चलायी जाएंगी।
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एनसीईआरटी व निजी प्रकाशन के मूल्यों में अंतर
एनसीईआरटी
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कक्षा एक- 230 रुपये
कक्षा दो से तीन-300 रुपये
कक्षा 4 से आठ तक-300-850 रुपये
नवीं से 12वीं तक- 1050 से 1130 रुपये
निजी प्रकाशन
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कक्षा एक-1700 रुपये
कक्षा दो से तीन- 1700-2400 रुपये
कक्षा चार से आठ-4600-6200 रुपये
नवीं से 12वीं तक-6800-8500 रुपये