किच्छा के पिपलिया में दस एकड़ जमीन पर स्थित करीब 30 करोड़ रुपये के फॉर्म पर कब्जे के लिए नसरीन और सायरा वाड्रा हैं। नसरीन स्वयं को जमीन की प्राकृतिक दावेदार बता रही हैं जबकि सायरा वसीयत में नाम होने का हवाला देकर फार्म पर हक जता रही हैं। वाड्रा परिवार का नाम आने के बाद से कांग्रेस सड़क पर उतरकर सियासत कर रही है। भाजपा ने वाड्रा परिवार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
बुधवार को कांग्रेस ने देर रात तक फार्म को सायरा की जमीन बताकर देर रात तक धरना दिया था। बृहस्पतिवार को दोनों पक्षों को एसडीएम कार्यालय बुलाया गया था। सुबह से ही वहां कांग्रेसियों का जमावड़ा लग गया। सायरा अपने वकीलों के साथ एसडीएम कार्यालय पहुंची जबकि नसरीन के वकील आए।
एडीएम पंकज उपाध्याय, एसडीएम गौरव पांडे और तहसीलदार गिरीश चंद त्रिपाठी ने बंद कमरे में दोनों पक्षों को सुना। दोपहर दो बजे तक चली बैठक के बाद भी कोई नतीजा नहीं निकला। मामले का हल नहीं निकलने के बाद कांग्रेस ने अगले कदम की घोषणा करते हुए छह जुलाई को कलक्ट्रेट कूच की चेतावनी दी है। इस मौके पर सितारगंज के पूर्व विधायक नारायण पाल, कांग्रेस के जिलाध्यक्ष हिमांशु गाबा, रुद्रपुर महानगर कांग्रेस अध्यक्ष ममता रानी, मोहन खेड़ा, बबलू चौधरी, निवर्तमान पालिकाध्यक्ष दर्शन कोली, विनोद कोरंगा, नारायण सिंह बिष्ट, राजेश प्रताप सिंह, संजय जुनेजा, अशोक चुघ, जीवन जोशी, गुलशन सिंधी, गणेश उपाध्याय, दलजीत सिंह खुराना, मेजर सिंह, राम बाबू, जिला पंचायत सदस्य प्रेम आर्य, इमरान मलिक, विनोद पंत, चंदन पांडे, आरिफ कुरैशी, हाजी शरीफ मलिक थे।
फार्म का कब्जा नसरीन को देने के लिए पुलिस-प्रशासन मिलीभगत कर रहा है। पुलिस की मदद से ही सायरा के स्टाफ को बाहर निकाला गया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं की आवाज को भी दबाने की कोशिश की गई। इस मामले में पार्टी चुप नहीं रहेगी। जरूरत पड़ी तो मैं कलक्ट्रेट परिसर में ही आत्मदाह करुंगा। -तिलक राज बेहड़, विधायक, किच्छा
दोनों पक्षों के मामले न्यायालय में विचाराधीन हैं। इस पर टिप्पणी नहीं की जा सकती। एक पक्ष स्वयं को मृतक का उत्तराधिकारी बता रहा है। दूसरे पक्ष का कहना है कि फार्म की वसीयत उनके नाम पर है। दोनों पक्षों से शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील की गई है। मामले की सुनवाई 16 जुलाई को निर्धारित है। जो भी आदेश होगा उसे लागू करवाया जाएगा। -पंकज उपाध्याय, एसडीएम
इस फार्म की मालकिन कुलसुम खान मेरी बुआ थीं। उन्होंने अपने जीते जी 2024 में एक रजिस्टर्ड वसीयत बनाकर मुझे और अपने चचेरे भाई सिकंदर आलम खान को बेनिफिशरी बनाया था। उनके निधन के बाद ये महिला सामने आई और परेशान करने लगी। मुझे कानून पर पूरा विश्वास है। -सायरा वाड्रा, पक्षकार
नसरीन सांगा ही इस फार्म की असली वारिस हैं। अधिकारियों के समक्ष हमने भी अपने कागजात रखे हैं। दूसरे पक्ष के पास कोई कागजात नहीं है। वसीयत के आधार पर हो रहे दाखिल खारिज में आपत्ति लगा रखी है।-शुभम छाबड़ा, नसरीन के अधिवक्ता
किच्छा के बवाल पर एसएसपी कार्यालय की सुरक्षा बढ़ाई
एसपी सिटी उत्तम सिंह नेगी ने कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता है। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया। एहतियात के तौर पर सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह सख्त रखी गई थी, हालांकि पूरे दिन माहौल शांतिपूर्ण रहा।