हल्द्वानी से सितारगंज अपनी पत्नी और पुत्र की मौत की खबर सुनकर गोपाल डोलिया जब अस्पताल पहुंचे तो बेसुध हो गए। किसी तरह उन्हें संभाला गया तो दोनों के मृत शरीर देखकर भर्राए गले से बोले कि शवों का भार उठाने की ताकत मेरे कंधों में नहीं है।
इस दुनिया का सबसे बड़ा बोझ और दुःख अगर कोई है तो पिता के कंधे पर बेटे का जनजा। जीवन संगिनी भी साथ छोड़ जाए तो इससे बड़ा गम कोई हो ही नहीं सकता। हल्द्वानी से सितारगंज अपनी पत्नी और पुत्र की मौत की खबर सुनकर गोपाल डोलिया जब अस्पताल पहुंचे तो बेसुध हो गए। किसी तरह उन्हें संभाला गया तो दोनों के मृत शरीर देखकर भर्राए गले से बोले कि शवों का भार उठाने की ताकत मेरे कंधों में नहीं है। परिजनों ने दिलासा देने की कोशिश की तो वह बिलख पड़े।
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असीम दुख को अपने सीने में दबाए गोपाल डोलिया की जुबां तो खामोश है लेकिन आंखों से बहते आंसू उनके दिल के दर्द को बयां कर रहे हैं। कोई कंधे पर हाथ रख दिलासा दे रहा है तो वह फफककर रो पड़ते हैं। गोपाल का बेटा अंकित हल्द्वानी के एमबीपीजी कॉलेज से बीकॉम की पढ़ाई कर रहा था। उनकी माता जानकी कुशल गृहिणी थी।
पिता गोपाल डोलिया रुद्रपुर स्थित सिडकुल की निजी कंपनी में काम करते हैं। हादसे में पत्नी और इकलौते बेटे की मौत की सूचना मिली तो गोपाल के पांव तले जमीन खिसक गई। इधर, मां और भाई की मौत की खबर सुनकर बहन का भी रो-रोकर बुरा हाल है। अस्पताल में परिजन पिता-पुत्री को ढांढस बांधने का असफल प्रयास करते दिखाई दिए।