उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के साथ उद्योगपतियों की मंगलवार को एक बैठक हुई। उद्योगपतियों ने कहा कि बोर्ड रेड श्रेणी के उद्योगों को एक साल के लिए ही अनुमति दे रहा है जबकि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देशानुसार पांच साल के लिए अनुमति दी जानी चाहिए। साथ ही मांग की है कि 25 करोड़ तक के उद्योगों की अनुमति क्षेत्रीय कार्यालय को मिलनी चाहिए।
मंगलवार को चैंबर हाउस में केजीसीसीआई और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड उत्तराखंड के सदस्य/ सचिव एसपी सुबुद्धि की बैठक हुई। बैठक में कहा गया कि अन्य राज्यों में भी रेड श्रेणी के उद्योगों को पांच साल के लिए ही अनुमति दी जा रही है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालयों को पांच करोड़ तक के निवेश की इकाइयों को ही अनुमति प्रदान किए जाने का अधिकार है। यह मांग के अनुरूप बेहद कम है। इस सीमा को बढ़ाकर 25 करोड़ किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि विभाग की एनओसी एवं नवीनीकरण के लिए निर्धारित फीस का ढांचा अन्य राज्यों की तुलना में अधिक जटिल है। इसमें सरलीकरण किया जाना चाहिए। राज्य में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के गठन के पूर्व की कुछ लघु श्रेणी की इकाइयां विभाग में पंजीकृत नहीं हैं जो कि अधिकांश ग्रीन श्रेणी की हैं। इसलिए इनके नियमितीकरण के लिए एकमुश्त समाधान योजना लाए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने मांग की है कि जहरीले पदार्थ एवं ई-वेस्ट के निस्तारण के लिए और अधिक संस्थाओं को अधिकृत किया जाना चाहिए। केजीसीसीआई के अध्यक्ष विकास जिंदल ने बोर्ड के सदस्य एसपी सुबुद्धि को बताया कि उद्योग पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण के प्रति अत्यधिक सजग हैं। जल एवं वायु प्रदूषण के नियंत्रण को उद्यमी अपने उद्योगों में उन्नत किस्म की तकनीकों का प्रयोग कर रहे हैं। बावजूद इसके प्रदूषण के लिए उद्योगों को ही जिम्मेदार ठहराया जाता है जबकि शहरी वातावरण एवं वाहनों के द्वारा भारी मात्रा में प्रदूषण फैल रहा है। केजीसीसीआई के सिडकुल चैप्टर के चेयरमैन अनूप सिंह ने भी कहा कि सिस्टम में सुधार किया जाना चाहिए।
सदस्य सचिव एसपी सुबुद्धि ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इकाइयों को हर तरह से सहयोग करने के लिए तत्पर है लेकिन इकाइयों को भी प्रदूषण नियंत्रण नियंत्रण बोर्ड के मानकों का पालन करना चाहिए। उन्होंने समस्याओं को यथाशीघ्र दूर कराने तथा उद्योगों का पूर्ण सहयोग करने का आश्वासन दिया। वहां पर देहरादून के पर्यावरण अभियंता डॉ. अंकुर कंसल, काशीपुर के क्षेत्रीय अधिकारी सोमपाल सिंह, योगेश कुमार जिंदल, हरविंदर सिंह, पवन अग्रवाल, एसपी गुप्ता, एनएस चौहान, लोमेश शर्मा, अनूप सिंह, पुनीत गोयल आदि थे।