राज्य आंदोलन में खटीमा गोलीकांड के शहीदों को शहीदी दिवस एक सितंबर को पुराने तहसील परिसर में श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। इस बार कोरोना के चलते उनके चित्र पर माल्यार्पण कर याद किया जाएगा।
रविवार को लोनिवि के अतिथि गृह में वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी एडवोकेट गोपाल सिंह बिष्ट की अध्यक्षता और अमित पांडे के संचालन में बैठक हुई। इस दौरान विधायक पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि जनभावनाओं के अनुरूप पुराने तहसील परिसर में ही शहीद स्मारक बनाया जाएगा।
पुराने तहसील परिसर में शहीदों के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी जाएगी। सैन्य शहीद स्मारक को भी पुराने तहसील में बनाने पर पुनर्विचार होगा। भविष्य में कार्य के लिए एक स्वतंत्र कमेटी पर भी सभी को विश्वास में लेकर कार्य होगा।
एडवोकेट गोपाल सिंह बिष्ट ने पुराने तहसील परिसर में स्मारक निर्माण के लिए सीएम और विधायक का आभार जताते हुए प्रस्तावित आमरण अनशन स्थगित किया। उन्होंने कहा कि आगे का कार्य जनता को विश्वास में लेकर होगा। वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी भगवान जोशी ने पालिका की ओर से पुराने तहसील परिसर से कूड़ा न उठाने पर रोष जताया।
उन्होंने कहा कि जनभावनाओं से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस बीच चर्चा के बाद स्थल का भी जायजा लिया गया। वहां सुरेश चंद, गणेश ठकुराठी, जगदीश चंद्र, रंदीप पोखरिया, हिमांशु बिष्ट, नवीन कन्याल, गजेंद्र चंद, उमेद सिंह, बहादुर रावत, नारायण दत्त तिवारी, गणेश मंडेला आदि थे।
पालिका ईओ ने सात शहीदों में से छह के चित्रों की व्यवस्था की
खटीमा। उत्तराखंड राज्य आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि देने संबंधी कार्यक्रम की तैयारियां परवान चढ़ने लगी हैं। पालिका के ईओ धर्मानंद शर्मा ने सात शहीद आंदोलनकारियों में से छह आंदोलनकारियों के चित्रों की व्यवस्था कर ली है।
इधर उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी संगठनों की संयुक्त बैठक में पुराने तहसील परिसर में शहीदों को श्रद्धांजलि देने की घोषणा की गई है। इस संबंध में रविवार को हुई सर्वदलीय बैठक में यह निर्णय लिया गया।
वहीं तहसील परिसर पर डाला गया कूड़ा बारिश के पानी में सड़ कर दुर्गंध फैलाने लगा है। ईओ धर्मानंद शर्मा ने रविवार शाम तहसील परिसर में फैलाए गए कूड़े का जायजा लिया। ईओ ने बताया कि आंदोलनकारियों की भावना के अनुसार पुराने तहसील परिसर के किसी कोने में श्रद्धांजलि अर्पित की जा सकती है।