इंश्योरेंस कंपनी का फर्जी अधिकारी बनकर करता था ठगी, कई राज्यों की पुलिस को है तलाश
संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रपुर। कुमाऊं साइबर थाना पुलिस ने फैक्टरी प्लांट हेड के साथ 36 लाख रुपये की ठगी करने वाले मास्टर माइंड को दिल्ली से गिरफ्तार किया। आरोपी इंश्योरेंस कंपनी का फर्जी कर्मचारी बन कर कई राज्य के लोगों से ठगी कर चुका है। हाल ही में तिहाड़ जेल से जमानत पर वह छूटा है। इसके अलावा भोपाल पुलिस भी उसे गिरफ्तार कर चुकी है। अभी भी कई राज्यों की पुलिस को उसकी तलाश है।
रविवार को साइबर थाने में सीओ एसटीएफ सुमित पांडेय ने बताया कि सिडकुल की फैक्टरी में प्लांट हेड के पद पर तैनात ओमेक्स काॅलोनी निवासी राजेंद्र कुमार ने तहरीर में बताया था कि वर्ष 2021 से 2022 तक उन्होंने अलग-अलग सात बीमा पॉलिसी का संचालन शुरू किया था। जुलाई 2022 के बाद वह सभी को बंद कराना चाहते थे। इसी बीच उनके पास एक फोन आया जिसने खुद को बीमा विकास प्राधिकरण का अधिकारी बताया और उनकी पॉलिसी बंद कराने का झांसा दे कर रुपये वापस कराने की बात की।
कॉल करने वाले के झांसे में आ कर उन्होंने अलग-अलग किस्तों में उसे 36,26,938 रुपये बैंक के माध्यम से भेज दिए। इस दौरान उन्हें 94 लाख और 67 लाख रुपये के दो चेक भी मिले। जो फर्जी थे और बाउंस हो गए। मामले में केस दर्ज करने के बाद एसएचओ ललित मोहन जोशी ने मामले की विवेचना शुरू की। टीम ने करीब 12 दिन पहले नोएडा में जा कर डेरा डाला। काफी लोगों से पूछताछ कर और सर्विलांस के माध्यम से पुलिस ने मूल रूप से गांव गौरा पोस्ट अकोढा तहसील करछना जिला प्रयागराज यूपी और हाल में फ्लैट न. 911 टावर बी गौड़ सिटी, बिसरख जिला गौतमबुद्ध नगर यूपी निवासी वेद प्रकाश मौर्य को गिरफ्तार किया।
पुलिस को उसके कब्जे से सात मोबाइल फोन, विभिन्न कंपनी के सिम कार्ड, चेक बुक, एफडीआईई कंपनी की सील मुहर प्राप्त हुए। पूछताछ में उसने 36 लाख रुपये की ठगी करने की बात कबूली। सीओ का कहना है कि घटना में उसके दो साथी और भी शामिल थे। जो इस समय तिहाड़ जेल में ठगी के आरोप में बंद है। हालांकि आरोपी वेद भी दो माह पहले तिहाड़ जेल से छूट कर जमानत पर आया है।
इंटर पास मास्टर माइंड के सोशल मीडिया में हैं लाखों फॉलोअर्स
रुद्रपुर। आरोपी वेद इंटर पास और पिछले कई सालों से एनसीआर में रह कर ठगी की घटनाओं को अंजाम दे रहा है। उसके सोशल मीडिया के यूट्यूब, फेसबुक, इंस्टाग्राम सहित कई प्लेटफॉर्म में लाखों फॉलोवर्स हैं। वह डिजिटल मार्केटिंग का काम भी करता है। इसके अलावा सोशल मीडिया पर गाना भी गाता है। पुलिस से बचने के लिए आरोपी लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा था। वह नोएडा में रहता था लेकिन लोगों को फोन कर ठगी करने के लिए वह रोज दिल्ली जाता था ताकि पुलिस उस तक न पहुंच सके। उसकी तलाश के लिए पुलिस को 12 दिन तक एनसीआर की खाक छाननी पड़ी। सीओ एसटीएफ का कहना है कि अभी मामले की विवेचना की जा रही है। मामले में और लोगों के नाम भी सामने आएंगे। संवाद
ऐसे लोगों को लेते थे झांसे में
रुद्रपुर। आरोपी अपने साथियों के साथ मिलकर बीमा कंपनी का डेटा प्राप्त कर उस डेटा में ऐसे नबरों को चिन्हित करते थे, जो अपनी पाॅलिसी के संबंध में कस्टमर केयर से बात कर चुके हो। ऐसे पाॅलिसी धारको के साथ फर्जी आईडी के सिम कार्ड का प्रयोग कर स्वयं को बीमा कंपनी का कर्मचारी बताते हुए बात करते थे। उनकी बीमा पालिसी की धनराशि निकालने में मदद करने के नाम पर क्लिरेन्स, जीएसटी आदि शुल्क के नाम पर धनराशि को बैंक खातो में जमा करवाते थे। ठग लोगों को उनके प्लान के मुताबिक शेयर मार्केट में इनवेस्ट कर अधिक मुनाफा कमाने का लालच देकर धनराशि अपने बैंक खातो में जमा करवा कर ठगी की घटना को अंजाम देते थे। इस काम के लिए फर्जी आईडी के नंबरों और फर्जी जीमेल अकाउंट का प्रयोग कर आरोपी कंपनी के अधिकारी बनकर लोगों को ईमेल, व्हाट्सएप और फोन कॉल करते थे। ठगी हुई धनराशि निकालने के लिए फर्जी आईडी के बैंक खातों का भी प्रयोग करते थे।