शांतिपुरी। क्षेत्र के शांतिपुरी नंबर तीन में नौकरी के सिलसिले में घर छोड़कर भागे भगत सिंह 37 साल बाद लौटे तो परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। इतने साल बाद भगत को सकुशल देख परिजन बेहद खुश हैं।
शांतिपुरी नंबर तीन निवासी भगत सिंह 17 साल की उम्र में नौकरी के सिलसिले में घर छोड़ गए थे। काफी समय तक परिजनों ने पांच भाइयों में दूसरे नंबर के भगत के बारे में मालूमात की तो सुराग नहीं लगा। बुधवार की रात भगत अपना घर खोजते हुए शांतिपुरी पहुंच गए। बड़े भाई भुवन और छोटे भाई चंदन ने उन्हें पहचाना और गले लगा लिया। इसके बाद वे अपनी मां और रिश्तेदारों से मिले।
भगत ने बताया गया कि उन्होंने नैनीताल, रुद्रपुर, मुरादाबाद, रामपुर के अलावा कोटद्वार में बिस्कुट फैक्टरी में 10 साल काम किया थ। इसके बाद ऋषिकेश में मजदूरी की और सब्जी का ठेला लगाकर जीवन यापन किया और शादी की। एक साल पहले भी अपनी जन्म भूमि और अपने मां-बाप से मिलने के लिए शांतिपुरी क्षेत्र में आया था। उस वक्त वह सही से घर का पता नहीं लगा सका था।
10 साल बाद बेटा घर लौटा तो खुशी से छलके आंसू
मध्य प्रदेश के मनोरा से हुआ था लापता, रुद्रपुर में मिला
रुद्रपुर। मध्य प्रदेश के मनोरा गांव से 10 साल पहले लापता हुआ एक युवक रुद्रपुर में मिल गया। बेटे को जिंदा देखकर पिता की आंखोें से आंसू छलक आए। उन्हाेंने बेटे को खोजने वाले पुलिसकर्मियों का आभार जताया।
मध्यप्रदेश के जिला देवास के ग्राम मनोरा निवासीर अर्जुन सिंह ठाकुर का बेटा कांति लाल वर्ष 2013 में लापता हो गया था। जिसके बाद से परिजनों ने उसकी काफी जगहों पर तलाश की मगर वह नहीं मिल सका था। मानसिक रूप से कमजोर कांति लाल की तलाश परिजनों ने बंद नहीं की थी। बृहस्पतिवार को अर्जुन सिंह कोतवाली पहुंचे और रुद्रपुर में अपने बेटे के होने की संभावना जताई। एसएसआई अर्जुन गिरी की टीम के साथ विभिन्न जगहों पर कांति की तलाश की।
टीम ने गदरपुर रोड में ग्राम धौलपुर स्थित तेसवानी फाउंडेशन से कांति को खोज लिया। फाउंडेशन के लोगों ने पुलिस को बताया कि कई साल पहले यह लड़का उन्हें मिला था। मानसिक रूप से कमजोर होने की वजह से वह अपना पता नहीं बता सका। पिता अर्जुन ने बताया कि लापता होने के समय कांति की उम्र 17 साल की थी। कांति तीन बच्चों में दूसरे नंबर का है।