जिले को कुपोषण मुक्त करने के लिए माइक्रो प्लानिंग तैयार की गई है। डीएम के निर्देशन में तैयार माइक्रो प्लानिंग के तहत एक साल से अधिक के सभी अतकिुपोषित बच्चों को रोजाना आंगनबाड़ी केंद्रों में परवरिश केंद्रों की तर्ज पर तीन पौष्टिक डाइट दी जाएंगी। कुपोषित पंजिका में अति कुपोषित और कुपोषित बच्चों का डाटा बेस तैयार किया जाएगा। चिन्हित कुपोषित बच्चे के घर पर पोषण अभियान का पीला और अति कुपोषित बच्चे के घर पर लाल रंग का स्टीकर भी लगाया जाएगा।
जिले को कुपोषण मुक्त करने के लिए राष्ट्रीय पोषण मिशन के तहत पोषण अभियान चल रहा है। कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों को टेक होम राशन दिया जाता है जबकि सीएसआर के तहत अति कुपोषित बच्चों को आयरनयुक्त बिस्किट भी दिए जाते हैं। टाटा कंपनी के सहयोग से अति कुपोषित बच्चों के लिए भूतबंगला और शिवनगर में दो परवरिश डे केयर भी संचालित हो रहे हैं। इनमें तीन घंटे की निगरानी में अति कुपोषित बच्चों को डायटीशियन की सलाह पर तीन डाइट दी जाती हैं। परवरिश डे केयर में आने वाले बच्चों के तेजी से रिकवर होने के बाद अब यह फार्मूला आंगनबाड़ी केंद्रों में भी लागू करने की तैयारी हो रही है। बीते दिनों कलक्ट्रेट में हुई समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री के निर्देश के क्रम में डीएम डॉ. नीरज खैरवाल के निर्देशन में चिन्हित कुपोषित बच्चों को जून 2019 तक कुपोषण मुक्त करने के लिए रोड मैप तैयार किया गया है। इसके तहत हर सुपरवाइजर सेक्टर पर कुपोषण पंजिका तैयार कर उसमें कुपोषित और अति कुपोषित के स्वास्थ्य जांच, वजन सहित पूरा ब्योरा रखा जाएगा। हर आंगनबाड़ी केंद्र की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की कुपोषित बच्चों को लेकर व्यक्तिगत जिम्मेदारी होगी।