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Udham Singh Nagar News: तराई में बेमौसमी धान का विकल्प नहीं बन सकी मक्का

Sat, 05 Sep 2026 12:20 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
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काशीपुर। भूजल संरक्षण के लिए धान की बेमौसमी खेती पर रोक के बाद जिला प्रशासन और कृषि विभाग ने जिस मक्का को विकल्प के रूप में प्रोजेक्ट किया था। किसानों की हित में वह कारगर नहीं हो रहा है। बाजार नहीं मिल पाने और बेतहाशा ट्रांसपोर्ट खर्च से तराई में यह प्रयोग फेल होता नजर आ रहा है।
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बेमौसमी धान पर सरकार की रोक के बाद जिले के किसानों ने इस बार बड़े पैमाने पर मक्का लगाई थी, लेकिन कटाई के बाद का गणित देखकर उनका मोह भंग हो गया है। किसानों को मक्का का बीज सब्सिडी पर दिया गया। उम्मीद थी कि कम पानी, कम लागत और अच्छा बाजार मिलेगा। मगर अब यही मक्के की फसल किसानों के गले की फांस बन गई है।
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तराई में मक्का की सरकारी खरीद का कोई ढांचा नहीं है। स्थानीय मंडी में भाव 1400-1600 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि एमएसपी 2400 रुपये के आसपास है। अच्छा भाव लेने के लिए माल बरेली, रामपुर या बिलासपुर की फीड मिलों तक भेजना पड़ रहा है। इसमें आठ से 10 हजार रुपये ट्रांसपोर्ट और दो हजार रुपये बोरियां व लोडिंग का खर्च आ रहा है। - दिलबाग सिंह, किसान
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हाइब्रिड मक्का में बीज ही 1000 रुपये प्रति किलो है। खाद-कीटनाशक मिलाकर लागत 18 हजार तक पहुंच रही है, लेकिन उत्पादन 22-25 क्विंटल ही रह गया। जब तक गन्ना और धान की तरह मक्का पर सरकारी खरीद केंद्र नहीं खुलते। तब तक यह लाभदायक नहीं है। - समरपाल सिंह चीमा, किसान
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मक्का उत्पादन में पानी तो कम लगा, लेकिन मजदूरी ज्यादा लगी। भुट्टे तोड़ने के लिए पांच-छह मजदूर चाहिए, धान में यहीं काम कंबाइन से हो जाता है। किसानों के पास ड्रायर और भंडारण की सुविधा नहीं है। मक्का को सुखाने में 10 दिन लग गए। इससे अगली फसल लेट हो गई। - मोहम्मद रिजवान, किसान
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तराई में इस बार छह हजार हैक्टेयर मक्का की खेती हुई है, लेकिन नमी के कारण बाजार में उचित भाव नहीं मिल पा रहा है। यदि ड्रायर लग जाते हैं तो यह खेती काफी मुनाफे की हो सकती है। - डाॅ. कल्याण सिंह कृषि रक्षा अधिकारी काशीपुर
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