काशीपुर। उत्तराखंड में जनता समय-समय पर शराब का विरोध करती आई है। पहाड़ से मैदान तक शराब विरोधी आंदोलन भी चलाए गए। बावजूद इसके उत्तराखंड में दिनों दिन शराब की खपत बढ़ती जा रही है। इससे पिछले पांच सालों में उत्तराखंड सरकार को शराब से एक हजार करोड़ रुपये का राजस्व मिला। सूचना के अधिकार में इसका खुलासा हुआ है।
काशीपुर के अधिवक्ता/सूचना अधिकार कार्यकर्ता नदीमउद्दीन ने प्रदेश सरकार को शराब से मिले राजस्व के संबंध में कार्यालय आयुक्त राज्य कर उत्तराखंड सरकार से सूचना मांगी थी। जिसके आधार पर अपीलीय अधिकारी राहुल कुमार गोयल, अपर आयुक्त कर, राज्य कर मुख्यालय/प्रथम विभागीय अपीलीय अधिकारी ने सूचना उपलब्ध कराई है।
उपलब्ध सूचना के आधार पर वर्ष 2016 से 2021 फरवरी तक उत्तराखंड सरकार को एक हजार सात करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। इसमें से वर्ष 2016-17 में 146.76, 2017-18 में 185.72, 2018-19 में 219.76, 2019-20 में 219.50 और 2020 से 2021 फरवरी तक 235.26 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ।
2010 तक कम थी प्रदेश में शराब की खपत
काशीपुर। सूचना के अधिकार में मिले आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2010 तक प्रदेश में शराब की खपत काफी कम थी। इससे 2001-02 में सरकार को शराब की बिक्री से 15.90, 02-03 में 18.01, 03-04 में 21.08, 04-05 में 21.57, 05-06 में 28.49, 06-07 में 31.79, 07-08 में 37.62, 08-09 में 50.58 और 09-10 में 56.82 करोड़ रुपये राजस्व मिला था।
2013-14 में कम हुई थी शराब की खपत
काशीपुर। सूचना के अधिकार में मिली जानकारी के अनुसार 2010 के बाद प्रदेश में शराब की बिक्री बढ़ गई थी। 2012-13 तक बिक्री 108 करोड़ रुपये तक पहुंची लेकिन 2013-14 में खपत कम होने पर प्रदेश सरकार को सिर्फ 89 करोड़ रुपये का ही राजस्व शराब से मिला।