फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जीवन के सिर पर सब्बल से हमला कर साथी कैदी ने की थी हत्या

विज्ञापन
सितारगंज में हत्यारोपी कैदी जीतू सिंह को कोर्ट ले जाती पुलिस। - फोटो : SITARGANJ
विज्ञापन
सितारगंज। संपूर्णानंद शिविर (खुली जेल) के कैदी जीवन सिंह की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के रहस्य से पुलिस ने पर्दा उठा दिया है। दो कैदियों के बीच कुत्ते पालने को लेकर हुए झगड़े में साथी कैदी ने जीवन सिंह के सिर पर सब्बल से हमला कर उसकी हत्या कर दी थी। पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त सब्बल और मृतक के कमरे से कुल्हाड़ी और हंसिया जब्त कर लिया है। पुलिस ने हत्यारोपी कैदी को कोर्ट में पेशी के बाद जेल भेज दिया है।
विज्ञापन

बता दें कि 10 दिसंबर की रात को खुली जेल की वर्कशॉप में रहने वाले ग्राम रावल पट्टी थाना एवं जिला पिथौरागढ़ के जीवन सिंह (45) पुत्र गुमान सिंह की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। मामले को गंभीरता से लेते हुए अगले दिन एसएसपी दलीप सिंह कुंवर ने कोतवाल सलाहउद्दीन को जांच के आदेश दिए थे।
पोस्टमार्टम में मृतक जीवन के सिर पर चार जगह गंभीर चोट लगने से मौत होने की पुष्टि होने पर पुलिस ने हत्या की आशंका जताई थी। अगले दिन जेलर जयंत पांगती की तहरीर पर पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 के तहत केस दर्ज कर मामले की तफ्तीश शुरू कर दी थी।
विज्ञापन

सोमवार को सीओ सुरजीत ने घटना का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि मृतक जीवन सिंह के बराबर में ही गोशाला में काम करने वाले आजीवन कारावास के सजायाफ्ता कैदी जीतू (54) निवासी अहमदपुर ग्रांट थाना ज्वालापुर जिला हरिद्वार से उसका कुत्ते पालने को लेकर झगड़ा हो गया था। झगड़े के दौरान जीतू ने जीवन सिंह के सिर पर सब्बल से हमला कर दिया, जिसमें जीवन की मौत हो गई। बताया कि विवेचक कोतवाल सलाहउद्दीन ने हत्यारोपी जीतू को जेल से ही गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया और फिर जेल भेज दिया।
छूटने की थी आस, पर अब फांसी न हो जाए
मो. यामीन अंसारी
सितारगंज। खुली जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे बंदी जीवन सिंह की हत्या का आरोपी जीतू भी आजीवन कारावास का बंदी है। जीतू दो दशक से जेल में उम्रकैद की सजा काट रहा था और उसने शासन में माफी के लिए फाइल भी लगा रखी थी लेकिन अब यदि कैदी की हत्या के आरोप में दोष सिद्ध हो गया तो उसे फांसी भी हो सकती है। इसको लेकर पुलिस कानूनी राय लेकर हत्या की धारा 302 को धारा 303 में तरमीम कर सकती है।
हत्यारोपी बंदी अहमदपुर ग्रांट थाना ज्वालापुर जिला हरिद्वार निवासी जीतू ने बताया कि वर्ष 2001 में गांव में चाचा से नाली के पानी की निकासी को लेकर विवाद हो गया था। इसमें उसने चचेरे भाई सुभाष की हत्या कर दी थी। इसके बाद से वह और उसका भाई राजू जेल में बंद हैं। हाईकोर्ट ने उनकी जमानत की अपील खारिज कर दी और वर्ष 2005 में जिला एवं सत्र न्यायालय हरिद्वार से उम्रकैद की सजा मिली। वर्ष 2006 में वह दोनों को पेरोल पर एक महीने की जमानत पर घर जाने का मौका मिला। इसके बाद 2010 में वह यहां संपूर्णानंद खुली जेल में शिफ्ट किए गए। तब से इसी जेल में सजा काट रहे हैं।
जीतू ने बताया कि उन्होंने अपने बेहतर आचरण की वजह से शासन में सजा में माफी की फाइल भी लगाई है, जिस पर विचार होना था। लेकिन अब उसे माफी मिलना मुश्किल है। इधर, पुलिस भी कानूनी राय लेकर उस पर हत्या के आरोप में लगी आईपीसी की धारा 302 को 303 आईपीसी में तरमीम कर सकती है।
यदि कैदी आजीवन कारावास में दोष सिद्ध है और उसने जेल में रहते किसी की हत्या कर दी हो तो यह आईपीसी की धारा 303 के अधीन आता है। कानूनी राय लेकर धारा को तरमीम किया जाएगा। इस धारा के अंतर्गत बंदी या कैदी को दोषी सिद्ध होने पर फांसी की सजा होती है। - देवेंद्र पींचा-एसपी सिटी, यूएसनगर।
खुली जेल में पहली बार हुई कैदी की हत्या
सितारगंज। खुली जेल के इतिहास में यह पहला मौका है जब किसी कैदी ने दूसरे कैदी की हत्या (10 दिसंबर बृहस्पतिवार) कर दी है। इससे जेल के कैदियों में जहां दहशत है तो वहीं, जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रदेश की एकमात्र खुली जेल में बेहतर आचरण वाले करीब एक हजार कैदियों को ही रखा जाता था। गाहे-बगाहे कैदियों के पास मोबाइल निकलने या फिर बीमार कैदियों की मौत होने जैसे मामले तो सामने आए लेकिन कभी किसी की हत्या जैसे संगीन अपराध नहीं हुए। संवाद
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
सितारगंज। जेल में एक कैदी की ओर से दूसरे कैदी की निर्मम हत्या करने से सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। जेल में 24 घंटे सुरक्षा के लिए प्रधान बंदी रक्षक और बंदी रक्षकों की तैनाती रहती है। यहां तक कि खेतों में काम करने जाते समय भी बंदी रक्षकों के पहरे में कैदी भेजे जाते हैं लेकिन एक कैदी ने दूसरे कैदी की हत्या कर दी और जेल प्रशासन को उनके बीच झगड़े का पता तक नहीं चला। इससे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
जेल के बंदियों को कहां से मिलती है शराब
सितारगंज। कोतवाली पुलिस और हत्यारोपी बंदी जीतू से बात करने पर पता चला कि मृतक बंदी जीवन सिंह ने घटना से पहले शराब पी रखी थी। शराब के कारण छोटी सी बात को लेकर झगड़ा हुआ और फिर उसकी हत्या कर दी गई। सवाल ये उठता है कि खुली जेल के बंदी को आखिर शराब कहां से मिली। क्या ये बंदी खुली जेल के दायरे से बाहर जाते हैं या फिर कोई इन्हें शराब पहुंचाता था, यह जांच का विषय है।
चार बच्चों में दो बेटियों की हो चुकी है शादी
सितारगंज। हत्यारोपी बंदी जीतू (54) ने बताया कि 20 साल की उम्र में उसकी शादी हुई थी। वह पत्नी और चार बच्चों के साथ बेहद खुश था। मेहनत मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करता था लेकिन नाली के विवाद में हत्या के बाद उम्रकैद से उसका जीवन ही अंधेरे में चला गया। बताया कि उसकी पत्नी ने बड़े बेटे से छोटी 28 साल की बेटी और सबसे छोटी 22 वर्षीय बेटी की शादी कर दी लेकिन 30 वर्षीय बड़ा और तीसरे नंबर के 23 वर्षीय बेटे की अभी तक शादी नहीं हुई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें