रुद्रपुर। सरकारी विभागों से मिलने वाली शिकायतों को दर्ज करने में पुलिस लापरवाही बरत रही है। आलम यह है कि डीडीए के नाम पर व्यापारी को फर्जी नोटिस भेजने के शिकायती पत्र पर 25 दिन बाद भी केस दर्ज नहीं हो सका है। इधर सितारगंज की कैलाश नदी में अवैध खनन के मामले में खनन उपनिदेशक के पत्र पर भी पुलिस की कार्रवाई नहीं हो सकी है। इसे विभागों के बीच तालमेल की कमी माना जा रहा है। एक साल के भीतर सरकारी विभाग से जुड़े चार ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें पुलिस ने केस दर्ज नहीं किया। मेडिकल कॉलेज के निर्माणाधीन हॉस्टल से सरिया चोरी का मामला भी जांच में ही उलझ गया है।
केस एक
13 सितंबर 2022 को मेडिकल कॉलेज के निर्माणाधीन छात्रावास से गैस कटर की मदद से आरसीसी पिलर से काटकर सरिया चोरी किया गया था। मेडिकल कॉलेज के तत्कालीन प्रभारी प्राचार्य ने सिडकुल चौकी में तहरीर दी थी। नैनीताल पुलिस भी मामले की जांच नहीं कर सकी। इसलिए मुख्यालय ने जांच एसटीएफ को सौंप दी है।
केस दो
12 जून को जिला सूचना अधिकारी कार्यालय के सरकारी वाहन चालक गायब हो गया था। विभाग की ओर से पंतनगर थाने में तहरीर दी गई थी। दो दिन चक्कर लगाने के बाद मामला दर्ज नहीं किया गया था। हालांकि बाद में एक गांव में वाहन मिल गया था।
केस तीन
सितारगंज की कैलाश नदी में चीकाघाट पुल के पास बड़े पैमाने पर अवैध खनन किया गया था। डीएम ने उपनिदेशक खनन को मौके पर भेजकर जांच कराई थी तो आरोप की पुष्टि हुई थी। खनन का वीडियो भी वायरल हुआ था। छह सितंबर को उपनिदेशक खनन ने सितारगंज कोतवाली को रजिस्ट्री से पत्र भेजकर अवैध खनन में प्रयुक्त मशीन और वाहनों की जांच संबंधी कानूनी कार्रवाई कर डीएम कार्यालय कार्यालय में आख्या देने के लिए कहा था। एसएसपी की ईमेल भेजने के बावजूद केस दर्ज नहीं हो सका।
केस चार
बीते 27 जुलाई को शहर के व्यापारी को डीडीए के नाम से फर्जी नोटिस भेजा गया था। इसमें व्यापारी को दुकान के निर्माण को अवैध बताकर एक हफ्ते में प्राधिकरण कार्यालय में उपस्थित होने के लिए कहा गया था। सहायक सचिव के नाम पर भेजा नोटिस लेकर व्यापारी प्राधिकरण पहुंचा तो फर्जी हाेने का पता चला। 19 अगस्त को प्राधिकरण सचिव ने प्रभारी निरीक्षक रुद्रपुर को फर्जी नोटिस की कॉपी के साथ पत्र भेजकर एफआईआर दर्ज करने के लिए कहा था। इसके साथ ही डीएम और एसएसपी कार्यालय पर भी पत्र को रिसीव कराकर सूचना दी गई थी।
अधिकारी बोले
डीडीए के फर्जी नोटिस का मामला धोखाधड़ी से जुड़ा है। प्राधिकरण के उपाध्यक्ष को फोन पर बताया है कि सचिव पुलिस के राजपत्रित अधिकारी सीओ, एसपी सिटी या उनसे मिल कर एफआईआर दर्ज कराएं। दफ्तर में पत्र और फर्जी नोटिस के साथ उपस्थित होने के लिए सचिव को नोटिस भी भेजा गया है। सितारगंज का मामला संज्ञान में नहीं है। इसका पता लगाकर जांच के बाद कानूनी कार्रवाई करेंगे। -
मंजूनाथ टीसी, एसएसपी।
- मामलों में कार्रवाई न होने को दिखवाया जाएगा। पुलिस के अधिकारियों से जानकारी ली जाएगी। नियमानुसार कार्रवाई करने के लिए निर्देशित किया जाएगा।
- उदयराज सिंह, डीएम, ऊधमसिंह नगर।
- फर्जी नोटिस प्रकरण में 18 अगस्त को सचिव की ओर से एसएसपी और थाने को नोटिस के साथ पत्र भेजकर एफआईआर दर्ज करने के लिए कहा गया था। एसएसपी का फोन आने पर सचिव ने एसपी सिटी से बात की थी। एसपी सिटी ने जांच करने और जरूरत पड़ने पर बुलाने की बात कही थी। फिलहाल अभी केस दर्ज नहीं हुआ है।
- हरीश कांडपाल, उपाध्यक्ष, डीडीए।