उत्तर प्रदेश की तर्ज पर गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग उत्तराखंड ने भी राज्य में खांडसारी लाइसेंसिंग नीति लागू कर दी है। गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग की ओर से लंबे समय से शासन से खांडसारी लाइसेंसिंग नीति लागू करने की मांग की जा रही थी। नीति लागू होने के बाद पहले चरण में विभाग को ऊधम सिंह नगर, देहरादून और हरिद्वार जिलों में कोल्हू के लाइसेंस के लिए 60 आवेदन प्राप्त हुए थे, इनमें से 57 लाइसेंस जारी कर दिए गए हैं। संवाद
सब्सिडी का भी मिलेगा लाभ
कोल्हू का लाइसेंस प्राप्त करने के बाद कोल्हू संचालकों को एमएसएमई (सूक्ष्य लघु व मध्यम उद्यम) के तहत लाभ दिए जाएंगे। पांच करोड़ रुपये से कम सालाना टर्न ओवर वाले कोल्हू संचालकों को सब्सिडी का लाभ भी मिलेगा।
किसानों को मिलेगा विकल्प
गुड़ उत्पादन को बढ़ावा मिलने से किसानों को चीनी मिल में पेराई सत्र में देरी की वजह से गन्ना खराब होने की समस्या का भी सामना नहीं करना पड़ेगा। उन्हें चीनी मिल के अलावा कोल्हू में गन्ना बिक्री करने का विकल्प मिलेगा। संवाद
90 के दशक तक तराई में थे सैकड़ों कोल्हू
रुद्रपुर। उत्तराखंड में वर्तमान में नैनीताल, ऊधम सिंह नगर, हरिद्वार और देहरादून में लगभग 450 कोल्हू संचालित हो रहे हैं, जबकि 90 के दशक में इनकी संख्या काफी अधिक थी। सिर्फ ऊधम सिंह नगर जिले में ही 150 से अधिक कोल्हू थे। भारतीय किसान संघ के प्रदेश महामंत्री और गन्ना किसान कुंवरपाल सिंह दहिया बताते हैं कि 30-35 साल पहले रुद्रपुर के फौजी मटकोटा, भूरारानी, धर्मपुर,भगवान पुर गावों में ही 25 से अधिक कोल्हू थे। लेकिन सरकार की ओर से इस पर ध्यान न देने के कारण इन क्षेत्रों में अब कोल्हू की एक-दो ही रह गई है। संवाद
राज्य में जैविक गुड़ को दिया जा रहा है बढ़ावा
रुद्रपुर। जैविक गुड़ के माध्यम किसानों की आय बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। पिथौरागढ़ जिले में 193 और चमोली में 26 किसानों को रसायन रहित गन्ने की रसायन रहित जैविक खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। मिशन ऑर्गेनिक के तहत ऊधम सिंह नगर, नैनीताल, हरिद्वार और देहरादून के गन्ना किसान भी इससे जुड़ रहे हैं। संवाद
स्वास्थ्य की दृष्टि से लोग अब गुड़ खाना अधिक पसंद कर रहे हैं। जिस कारण कोल्हू से गुड़ के उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी को देखते राज्य में पहली बार उत्तर प्रदेश की तर्ज पर अपनी खांडसारी लाइसेंसिंग नीति लागू की है। लाइसेंस के लिए गन्ना विकास विभाग में 200 रुपये का पंजीकरण शुल्क जमा करना होगा। यह लाइसेंस हमेशा के लिए मान्य होगा।
- हंसादत्त पांडेय, गन्ना आयुक्त
फोटो-16 आरडीपी 05पी- हंसादत्त पांडेय, गन्ना आयुक्त, उत्तराखंड।