ऊधमसिंह नगर में खनन के बाद अब लेबर सप्लाई और स्क्रैप व्यवसाय में हो रही मोटी कमाई पर स्थानीयों के साथ ही महाराष्ट्र, हरियाणा, यूपी के आपराधिक तत्वों की नजर है। राजनीतिक संरक्षण और अपनी दबंगई के चलते सिडकुल में अपना वर्चस्व कायम करने की होड़ मची हुई है। इसके चलते जिले में कभी भी खनन की तर्ज पर लेबर सप्लायर और स्क्रैप के व्यवसाय करने वालों में गैंगवार हो सकती है। क्योंकि हर माह सिडकुल की फैक्ट्रियों से जहां करोड़ों रुपयों का स्क्रैप निकलता है, वहीं लेबर सप्लाई के ठेकों में भी करोड़ों का कारोबार होता है।
वर्ष 2004 में सिडकुल की स्थापना के बाद देश के नामीगिरामी उद्योगपतियों ने अपनी फैक्ट्रियां लगाईं। बड़ी फैक्ट्रियों के साथ साथ छोटी फैक्ट्रियां (वेंडर फैक्ट्री) भी यहां पर स्थापित हुई हैं। वर्तमान में सिडकुल में करीब 450 फैक्ट्रियां उत्पादन कर रही हैं। फलस्वरूप प्रत्येक फैक्ट्री में काम करने के लिए जहां रोजाना ही हजारों की संख्या में श्रमिकों की जरूरत होती है। वहीं फैक्ट्रियों से लोहा, तांबा, एल्यूमिनियम, गत्ता समेत तमाम तरह के लाखों टन स्क्रैप हर माह निकलता है। इनका ठेका करोड़ों में होता है। सिडकुल की लेबर सप्लायर और स्क्रैप कारोबार से होने वाली मोटी कमाई पर स्थानीय के साथ ही महाराष्ट्र, हरियाणा, यूपी के बदमाशों की भी नजर है।
इसके लिए उन्हें जहां राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है, वहीं उनके पास बाहुबलियों की भी कमी नहीं हैं। ऐसे में सिडकुल की फैक्ट्रियों में लेबर सप्लाई करने और वहां से निकलने वाले स्क्रैप के कारोबार पर अपना वर्चस्व कायम रखने के लिए वे कुछ भी कर सकते हैं। यही वजह है कि अगस्त 2012 में स्क्रैप कारोबार में अपना वर्चस्व कायम रखने के लिए एक स्क्रैप व्यवसायी ने अपने साथियों के साथ मिलकर दिनदहाड़े नैनीताल रोड से स्क्रैप व्यवसायी अमित महाजन का अपहरण कर लिया था। वहीं वर्ष 2014 में प्रीत विहार कालोनी निवासी लेबर सप्लायर पर यूपी के शॉर्प शूटरों ने जानलेवा हमला कर दिया था। इधर गुरुवार को व्यवसायिक प्रतिद्वंद्विता के चलते अटरिया रोड स्थित लेबर सप्लायर करने वाले दो फर्मों के लोगों ने जहां तोड़फोड़ की वहीं, खुलेआम फायरिंग भी की। जो भविष्य के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं।