चुनाव कोई भी हो उसमें नारों और गानों का विशेष महत्व होता है जो अब भी बरकरार है। भाजपा, कांग्रेस और बसपा के नारे और गाने दोनों गांव-गांव गूंज रहे हैं। निर्दलीय प्रत्याशी भी पीछे नहीं हैं। खास बात यह कि स्थानीय भाषाओं के गानों और नारों से मतदाताओं को रिझाने की कोशिश हो रही है।
विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान इस समय जो नारे लोकप्रिय हैं, उनमें भाजपा का कुमाऊंनी में लिखा ‘आमा बूबू एको रटन, कमलो बटन-कमलो बटन’, बीएसपी का थरुवाटी में दिया ‘नारा दादो कहिन नतिया से, अबके देहरादून जाएंगे हथिया से’ भी शामिल हैं। इसके अलावा कांग्रेस प्रत्याशी ने भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाते हुए ‘विकास भी, ईमान भी, सबका सम्मान’ भी नारा बनाया है। निर्दलीय प्रत्याशी डा. ललित सिंह ने ‘दिल बदलो, दल बदलो, खटीमा का कल बदलो’ नारा दिया है।
इसी तरह चुनाव प्रचार में गाने भी खूब चल रहे हैं। निर्दलीय प्रत्याशी डा. ललित सिंह के वाहनों में कुमाऊंनी गाने बज रहे हैं, इनमें कई गीत पर्वतीय मतदाताओं को रिझाने के लिए बनाए गए हैं। रूमालिका गांठा, रियूड़ी लखनऊ की, नीमा छोरी रे खेत गांव की जैसे कई कुमाऊंनी गीतों की धूम मची है। इसी तरह कांग्रेस प्रत्याशी भुवन कापड़ी और भाजपा प्रत्याशी पुष्कर सिंह धामी के वाहनों में कई हिंदी गाने चल रहे हैं। बसपा प्रत्याशी भी इसमें पीछे नहीं हैं। इन दिनों गांव देहात में चल रही शादी ब्याह में होने वाले स्वांग में कलाकर बीएसपी प्रत्याशी का प्रचार अपने गानों और नाच के माध्यम से कर रहे हैं।