नजूल भूमि पर अवैध कब्जे के आरोपों में शासन की ओर से चुनाव लड़ने पर पांच वर्ष के लिए रोक के आदेश के बाद निवर्तमान मेयर सोनी कोली और उनके पति सुरेश कोली के तेवर तल्ख हो गए हैं। उन्होंने शासन के आदेश को जनविरोधी करार देते हुए इसके खिलाफ सोमवार को हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने का एलान किया है। उन्होंने नगर निगम से लेकर शहरी विकास विभाग के अफसरों पर सरकार को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए चुनाव लड़ने के समय दाखिल शपथ पत्र में झूठे तथ्य देने से इनकार किया है।
एक होटल में शुक्रवार को हुई पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि निवर्तमान मेयर और 16 पार्षदों पर चुनाव लड़ने से रोक लगाने का आदेश 17 लोगों पर ही नहीं, बल्कि नजूल पर काबिज एक लाख लोगों पर भी है। बस्तियों में रहने वाले लोग मेयर और पार्षद का चुनाव नहीं लड़ सकते हैं। यह बस्तियों में रहने वालों के साथ अन्याय है। निवर्तमान मेयर सोनी ने कहा कि उन पर चुनाव लड़ने की रोक की वजह उनके पति सुरेेश कोली की ओर से नजूल की जमीन पर स्कूल चलाना बताई गई है।
उन्होंने कहा कि यह स्कूल सोसायटी चलाती है और उनके पति सिर्फ पदाधिकारी हैं। यदि सोसायटी की ओर से संचालित स्कूल का नजूल भूमि पर कोई कब्जा है तो उसकी कार्यवाही सोसायटी एक्ट में होनी चाहिए। सोसायटी के एक सदस्य को जिम्मेदार ठहराना गलत है। निवर्तमान मेयर और उनके पति का किसी भी नजूल भूमि या स्कूल की संपत्ति पर किसी प्रकार का कब्जा नहीं है। कोली दंपति ने कहा कि जनविरोधी फैसले को लेकर वह सरकार नहीं बल्कि अफसरों से खफा हैं। सरकार के पास वे जवाब दाखिल कर चुके हैं। अब वे न्याय के लिए हाईकोर्ट में गुहार लगाएंगे। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति ने शिकायत की है, उसका परिवार नजूल भूमि पर काबिज है। शिकायतकर्ता खुद भी नजूल में रहकर सभासद बन चुका है।
पहले कांग्रेस और फिर भाजपा ने बचाई कुर्सियां
रुद्रपुर। नजूल भूमि पर काबिज होने के बावजूद चुनाव के दौरान झूठे शपथ पत्र देने के रामनगर और रुद्रपुर के मामले एक जैसे ही थे। लेकिन, रामनगर के मामले में चार सभासदों पर सिर्फ शिकायती पत्रों के आधार पर कार्रवाई तीन वर्ष के भीतर इसलिए हो गई कि वे निर्दलीय जीते थे। रुद्रपुर के मामले में मेयर और छह पार्षद भाजपा और आठ पार्षद कांग्रेस के हैं। लिहाजा कांग्रेस सरकार में कांग्रेस पार्षदों की वजह से सरकार कुर्सी बचाते रही और फिर भाजपा सरकार ने अपनी मेयर और पार्षदों की खातिर कांग्रेस पार्षदों का ख्याल रखा। यही वजह रही कि कोर्ट के सख्त रुख के बावजूद मामले को लटकाए रखा गया। अब बोर्ड का कार्यकाल पूरा होने के चार महीने के बाद कार्रवाई की गई।
अधिकांश वार्ड नजूल में तो चुनाव कौन लड़ेगा
रुद्रपुर। नजूल भूमि पर कब्जे के आधार पर निवर्तमान मेयर सहित 17 लोगों पर कार्रवाई तो हो गई है, लेकिन यह मामला सरकार के लिए मुसीबत खड़ा कर सकता है। दरअसल शहर में बड़ी संख्या में आबादी नजूल भूमि पर बसी है। पुराने 20 में से 18 वार्ड और नए परिसीमन में 40 में से करीब 30 वार्ड नजूल भूमि की जद आते हैं। चुनाव लड़ने के दौरान दावेदार के दो प्रस्तावक भी उसी वार्ड के होने चाहिए। ऐसे में सवाल खड़ा हो रहा है कि नजूल भूमि के अंतर्गत आने वाले वार्डों से चुनाव कौन लड़ेगा।
भाजपा नेता सुरेश कोली कहते हैं कि इन वार्डों में अगर दूसरे वार्डों से भी आकर लोग चुनाव लड़ें भी तो, उनको उसी वार्ड का प्रस्तावक कैसे मिल सकेगा। यह लड़ाई सिर्फ मेयर सहित 17 पार्षदों की नहीं है, बल्कि नजूल पर काबिज लोगों की है। इस लड़ाई की शुरुआत कर दी है। अगर कोई नजूल भूमि पर चुनाव लड़कर जीत भी गया तो फिर से ऐसी शिकायतों से उसकी सदस्यता खतरे में पड़ जाएगी। इस समस्या का ठोस समाधान किए जाने की जरूरत है।