सांपों का नाम सुनते ही जेहन में खौफ और लिजलिजा सा अहसास होता हो, मगर बरसात के मौसम में जहरीले सांपों से सावधान रहें। खतरनाक सांपों में किंग कोबरा तो है ही मगर करैत भी जहर के मामले में बहुत ज्यादा खतरनाक है। यही कारण है कि करैत के काटने से ही अधिकांश मौतें होती हैं। बरसात में बिलों में पानी घुसने के चलते सांप घरों, गोदामों में शरण ले लेते हैं। इसलिए इस मौसम में सर्पदंश की अधिकांश घटनाएं घटती हैं।
तराई में किंग कोबरा, करैत, धामन, अजगर और पानी वाले सांप पाए जाते हैं। पानी वाला सांप जहरीला नहीं होता है और अजगर जंगल में ही रहता है। सांप के नाम पर ज्यादातर लोग किंग कोबरा को ही जानते हैं। कोबरा की दो प्रजातियां किंग कोबरा और इंडियन कोबरा दोनों ही तराई में पाया जाता है। किंग कोबरा अधिकतर जंगल, खेतों में ही पाया जाता है। यदा कदा वह कारखानों, घरों तक पहुंचता है, जिसके चलते लोग उसका निशाना कम ही बनते हैं। लेकिन बारिश में बिलों में पानी भरने की वजह से करैत घरों, गोदामों में ज्यादा शरण लेता है। सबसे ज्यादा लोग करैत का ही निशाना बनते हैं। किंग कोबरा और करैत में न्यूरोटॉक्सिन टाइप प्वाइजन होता है।
वन्यजीव विशेषज्ञ दीप रजवार बताते हैं कि करैत सबसे ज्यादा जानलेवा होता है। यह रात्रिचर होता है, इसलिए यह ज्यादातर रात में ही काटता है। इसका काटना एक मच्छर की तरह होता है। इसलिए सोए हुए इंसान को इसके काटने का पता नहीं चलता है और कईं बार सोए हुए में ही उसकी मौत हो जाती है। इसके काटने के तीन से चार घंटे के भीतर इंसान की मौत हो जाती है।
एलडी भट्ट सरकारी अस्पताल के सीएमएस डॉ. वीके टम्टा के मुताबिक बरसात में ही सर्पदंश की ज्यादा घटनाएं होती हैं। जिसको देखते हुए एंटी स्नैक वेनम इंजेक्शन पर्याप्त मात्रा में रखे गए हैं। सांप के काटे व्यक्ति को दो से लेकर 15 एंटी वेनम तक लगाए जाते हैं। यह इंसान में फैले जहर की मात्रा और उसकी स्थिति पर निर्भर करता है। सामान्य तौर पर दो ही एंटी वेनम लगाए जाते हैं।
सांप काटने पर बरती जाने वाली सावधानियां
काटी हुई जगह से थोड़ा ऊपर कपड़ा या रस्सी का टुकड़ा बांधे, ताकि जहर शरीर के अन्य भागों में नहीं फैले।
जिस जगह पर सांप ने काटा है, वहां स्टेनलेस स्टील के चाकू से चीरा लगा देना चाहिए।
यदि संभव हो तो चीरा लगाई जगह से रक्त का चूषण किया जाए। उस स्थान पर थोड़ी-थोड़ी देर में नमक की पट्टियां रखी जाए
रोगी को आराम मिले, इसकी व्यवस्था की जानी चाहिए। यह कोशिश करें कि उसे नींद न आए। अधिकांश लोग मनोवैज्ञानिक डर से मर जाते हैं।