फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Udham Singh Nagar News: प्रदूषण से कल्याणी का रंग काला, अतिक्रमण से नदी बन गई नाला

Fri, 21 Apr 2023 11:53 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
विज्ञापन
विज्ञापन
रुद्रपुर। तराई में पवित्र मानी जाने वाली जीवनदायिनी कल्याणी नदी औद्योगिक नगरी में प्रदूषित हो चुकी है। सिडकुल और शहर के नाले गिरने से जहां नदी का रंग काला हो गया है। वहीं अतिक्रमण करने के बाद नदी अब नाले में तब्दील हो चुकी है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की सख्ती के बाद भी जिला प्रशासन की ओर से कल्याणी नदी को प्रदूषण मुक्त करने में हीलाहवाली की जा रही है। फैक्टरियों के गंदे पानी से लेकर कल्याणी नदी में लोगों की ओर से घरों का कूड़ा तक फेंका जा रहा है। प्रदूषित कल्याणी नदी को स्वच्छ बनाने के लिए पूर्व में कई बार नगर निगम और सामाजिक संस्थाओं की ओर से सफाई अभियान चलाया गया, उसके बाद भी नदी साफ नहीं हो सकी।
विज्ञापन


नदी को स्वच्छ बनाने और किनारे से अतिक्रमण हटाने की कवायद
अब पेयजल निगम की ओर से नमामि गंगा योजना के तहत कल्याणी नदी को स्वच्छ बनाने की कवायद की जा रही है। इसके तहत रम्पुरा स्थित नदी किनारे मैदान में एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) बनाने की योजना बनाई जा रही है। सर्वे के आधार पर देखा गया है कि कल्याणी नदी के समीप लोगों की ओर से अतिक्रमण कर घर आदि बना दिए गए हैं। इसके चलते नदी किनारे सीवरेज लाइन नहीं बिछ पा रही है। इसके चलते 919 करोड़ रुपये की डीपीआर पर आपत्ति लग चुकी है। पेयजल निगम की ओर से कल्याणी नदी के समीप अतिक्रमण हटाने के लिए जिला प्रशासन का सहयोग मांगा जा रहा है।

170 नालों का गंदा पानी गिरता है नदी में
रुद्रपुर। आईआईटी रुड़की के इंजीनियर व प्रोफेसर ने पेयजल निगम के इंजीनियरों के साथ नदी का कई घंटों तक सर्वे किया है। सर्वे में सामने आया की रुद्रपुर में 170 नालों का गंदा पानी नदी में गिरता है। नदी किनारे रहने वाले लोग अपने घर का कूड़ा नदी में डाल रहे हैं। पेयजल निगम के इंजीनियरों की मानें तो नदी को किस तरह साफ किया जाना है इसका प्लान बताने में आईआईटी की ओर से अच्छे खासे बजट की मांग की जाएगी।
विज्ञापन


कल्याणी नदी को नमामि गंगे योजना के तहत स्वच्छ बनाने की तैयारियां चल रही हैं। इसके लिए 919 करोड़ रुपये की डीपीआर भी बनाई गई। वहीं दूसरे विकल्प के तौर पर आईआईटी रुड़की के इंजीनियरों ने नदी का सर्वे भी किया है। इंजीनियरों की ओर से जल्द ही बताया जाएगा की किस तरीके से नदी को स्वच्छ करना है। इसके लिए वह बजट की मांग भी करेंगे। -मृदुला सिंह, ईई, पेयजल निगम।

ढेला को मैला कर रही शहर की गंदगी

काशीपुर। घरों से निकले कूड़े को शहरवासी ढेला नदी में डाल रहे हैं, जिस कारण नदी में जगह-जगह कूड़ा डंप हो रहा है। निगम प्रशासन की ओर से न तो नदी का कूड़ा साफ किया जाता है और न कूड़ा डालने वालों पर ही कोई कार्रवाई होती है। इसके अलावा शहर के नालों और सीवर का गंदा पानी भी कई जगह सीधे नदी में छोड़ा जाता है। शहर की सारी गंदगी लक्ष्मीपुर माइनर में जाती है और ये माइनर जाकर ढेला नदी में गिरकर उसे प्रदूषित कर रही है। ढेला नदी यूपी में रामगंगा से मिलती है, जिससे गंगा नदी भी प्रदूषित हो रही है।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें