बारिश के चलते पेयजल संकट कम हो गया है, मगर व्यवस्था (शासन) को लोगों की तकलीफ की याद समय निकल जाने के बाद ही आती है।
मंत्री से लेकर अधिकारियों तक के गर्मियों में स्टेबलाइजर लगाने के वादे झूठे निकले। स्टेबलाइजर के लिए अभी 15 दिन का इंतजार करना पड़ेगा। ग्रामीण क्षेत्र के 74 ट्यूबवेलों में अगस्त के प्रथम सप्ताह से स्टेबलाइजर लगने की उम्मीद है।
पिछले वर्ष जून में गैरसैंण में विधानसभा सत्र के दौरान ट्यूबवेलों में स्टेबलाइजर लगने का मामला उठा था। स्टेबलाइजर के लिए आनन-फानन में प्रस्ताव मंगवाए गए थे।
हल्द्वानी शहर और ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को स्टेबलाइजर के नाम पर सिर्फ आश्वासन की घुटी मिलती रही। बड़ी-बड़ी परियोजना के लिए लाखों-करोड़ों रुपये स्वीकृत हुए, मगर दो करोड़ की राशि के लिए जल संस्थान विभाग को महीनों इंतजार करना पड़ा।
जल संस्थान के मुख्य महाप्रबंधक एसके गुप्ता ने बताया कि अभी स्टेबलाइजर लगने में 15 दिन लगेंगे। कंपनियों के अधिकारियों से बात हुई है, कंपनी ने जल्द स्टेबलाइजर लगाने का काम शुरू करने का आश्वासन दिया है।
उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र में लगने वाले स्टेबलाइजर पर दो करोड़ 20 लाख रुपये खर्च होंगे। गुप्ता ने बताया कि राज्य के सभी जिलों के शहरी क्षेत्रों में 200 से 250 स्टेबलाइजर लगने हैं, इसके लिए शासन से 18 करोड़ रुपये की मांग की गई है।