राज्य खाद्य एवं औषधि विश्लेषण शाला (फूड एवं ड्रग्स लैब) की ओर शासन से लेकर जिम्मेदार अफसरों के मुंह फेरने से इसकी हालत खराब होती चली गई। इसमें खास बात यह है कि वर्तमान में प्रयोगशाला प्रभारी के नियमित नहीं बैठने से भी फूड लैब पूरी तरह से प्रभावित हो रही है। आलम यह है कि वर्तमान में यहां पर औषधि विश्लेषक के नहीं होने से ड्रग्स की जांच का काम भी भगवान भरोसे ही चल रहा है। वर्ष 2015 में राजकीय विश्लेषक के जाने के बाद से राज्य की एक मात्र फूड लैब पूरी तरह से लावारिस हो गई।
वर्ष 2015 तक आयुर्वेद विभाग से राजकीय विश्लेषक जसराम ध्यानी को लैब का इंचार्ज भी बनाया गया था। जब तक उनका कार्यकाल यहां रहा फूड लैब का कार्य अपने नियमों के साथ संचालित होता रहा। लेकिन वर्ष 2015 में वह अपने मूल विभाग आयुर्वेद को चले गए और उसके बाद इस लैब का प्रभार ऊधमसिंह नगर के सीएमओ को सौंप दिया गया। स्वास्थ्य महानिदेशालय ने सीएमओ को प्रयोगशाला प्रभारी के तौर पर लैब की व्यवस्थाएं सौंप दीं। उसके बाद से यहां पर आज तक न तो स्थायी खाद्य विश्लेषक की ही तैनाती हो पाई और न ही औषधि विश्लेषक की।
इसके साथ-साथ लैब की अनुशासनात्मक व्यवस्थाएं भी पटरी से उतरती चली गई। इसका मुख्य कारण प्रयोगशाला प्रभारी का नियमित नहीं बैठना भी रहा। इससे सभी व्यवस्थाएं लड़खड़ा गई और हालात दिन प्रतिदिन खराब होते चले गए। शासन स्तर से ही लैब में किसे प्रभारी का दायित्व सौंपा जाना है इसमें भी गंभीरता नहीं बरती गई। नियमों के मुताबिक लैब का प्रभारी उसी व्यक्ति को बनाया जा सकता है जो कि तकनीकी दृष्टि से लैब के मानकों को पूरा करता हो, ऐसे में सीएमओ को प्रभारी का दायित्व सौंपा जाना भी स्वास्थ्य महानिदेशालय की जल्दबाजी ही माना जा रहा है। विभागीय सूूत्रों का कहना है कि जांच को आने वाले सैंपलिंग में फाइनल रिपोर्ट तकनीकी व्यक्ति की ही मानी जाती है, जबकि सीएमओ तकनीकी दृष्टि से जांच के सैंपलिंग को किस आधार पर फाइनल करते रहे हैं यह भी एक गंभीर सवाल है। माह सितंबर को मैसूर लैब से यहां वरिष्ठ विश्लेषक खाद्य मनोरंजन कुमार को लोक सेवा आयोग से चयनित कर भेजा गया है। लेकिन उन्हें भी प्रशासनिक स्तर पर कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी गई।
स्वास्थ्य महानिदेशक डीएस रावत का कहना है कि राज्य खाद्य एवं औषधि विश्लेषण शाला में प्रयोगशाला प्रभारी के नियमित नहीं बैठने से वहां कौन सी व्यवस्थाएं खराब हो रही हैं, इसे गंभीरता से देखा जाएगा। लैब में जांच का कार्य किसी तरह से प्रभावित न हो इसके लिए भी निदेशालय से हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। विभाग लैब के स्टाफ के रिक्त पदों को भरने के लिए भी पूरी तरह से गंभीर और प्रयासरत है। सभी व्यवस्थाएं जल्द से जल्द पूरी कर दी जाएंगी।