फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

तमाम उपलब्धियों के बावजूद खामोश हो गई ‘जनवाणी’

विज्ञापन
पंतनगर जनवाणी के लिए डॉ. एसके कश्यप को पुरस्कृत करते तत्कालीन संचार मंत्री अरुण जेटली। - फोटो : RUDRAPUR
विज्ञापन
पंतनगर कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के सामुदायिक रेडियो जनवाणी का प्रसारण अक्तूबर से ठप है। 90.8 मेगाहर्ट्ज की फ्रीक्वेंसी पर प्रसारित यह रेडियो सेवा पंतनगर के 20 किमी की रेडियस पर काफी पॉपुलर थी। किसान परक कई कार्यक्रमों के सफल प्रसारण से तराई के किसानों का पंतनगर विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों से सीधा संवाद होता था। हालांकि, अधिकारी इसके लिए बिजली उतार-चढ़ाव से स्टैंडबाई ट्रांसमीटर का फुंकना वजह बता रहे हैं। साथ ही उपकरण के लिए विवि के उच्चाधिकारियों के पास तीन लाख रुपये बजट आवंटन सहित केंद्रीय संचार मंत्रालय के वायरलेस प्लानिंग कोआर्डिनेटिंग विंग में सेवा दोबारा शुरू करने की अनुमति लेने संबंधी फाइल भेजने की बात कह रहे हैं।
विज्ञापन

पंतनगर विवि के संचार केंद्र में किसानों की कृषि व पशुपालन संबंधी समस्याओं का समाधान करने के उद्देश्य से 15 अगस्त 2011 को सामुदायिक रेडियो सेवा पंतनगर जनवाणी की शुरूआत की गई थी। सुबह आठ से शाम आठ बजे तक प्रसारित होने वाली इस रेडियो सेवा के जरिये किसानों की कृषि समस्याओं संबंधी त्वरित और सटीक समाधान सहित रोजगारपरक और मनोरंजक कार्यक्रमों के प्रसारण से खूब प्रसिद्धि मिली।
नौ वर्षों के प्रसारण में जनवाणी को राष्ट्रीय सामुदायिक सेवा का सात बार प्रथम पुरस्कार तथा एक बार द्वितीय पुरस्कार मिला। जनवाणी से प्रतिदिन छह घंटे फ्रेश और छह घंटे रिपीट प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों में आरोग्य संपदा, इंटीग्रेटेड हेल्थ अवेयरनेस, आसमां की ओर, कैरियर अलर्ट, युवा स्वर, वॉइस ऑफ यूथ, गांव की बात, वॉइस ऑफ विलेज, आंचा की सुरभि, दि रीजनल फ्रेग्रेंस, राजू चाचा की कहानी, बच्चों की उत्साहवर्धक कहानियां, लघु नाटिका, दि स्ट्रीट प्ले, साहित्य संगमव जनवाणी प्रश्न मंच आदि ने खूब वाहवाही लूटी।
विज्ञापन

इलेक्ट्रिक फ्लक्चुएशन से स्टैंडबाई ट्रांसमीटर फुंकने से 15 अक्तूबर को जनवाणी की प्रसारण सेवा बाधित है। उपकरण के लिए कुलपति से तीन लाख रुपये बजट आवंटन की वार्ता होने के बाद फाइल भेज दी गई है। साथ ही केंद्रीय संचार मंत्रालय के वायरलेस प्लानिंग कोअ?ार्डिनेटिंग विंग को सेवा दोबारा शुरू करने की अनुमति के लिए भी पत्राचार किया गया है।
डॉ. एसके बंसल, निदेशक संचार- पंतनगर विवि
अच्छे शोध संस्थान को खत्म करने की सुनियोजित साजिश : ऐरी
पंतनगर। उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) ने पंतनगर कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की उपजाऊ भूमि पर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के निर्माण का कड़ा विरोध जताया है। यूकेडी के शीर्ष नेताओं ने सरकार को आगाह किया है कि एयरपोर्ट के लिए विवि की 1072 एकड़ उपजाऊ भूमि देने के बजाय मौजूद अन्य विकल्पों पर गौर किया जाए अन्यथा संगठन सड़कों पर उतरकर संघर्ष का बिगुल फूंकेगा।
संगठन ने कहा कि पहाड़ों में हो रहे भूक्षरण से खेती की जमीन तेजी से बंजर होती जा रही है। सरकार को उत्तराखंड में अनाज के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए यूएस की कृषि भूमि पर गैर कृषि कार्य करने पर तत्काल रोक लगानी चाहिए। परंतु सरकार पंत विवि की उपजाऊ भूमि पर ही एयरपोर्ट निर्माण करवाने पर आमादा है। ऐसा करने से विवि के शोध प्रभावित होंगे, जिससे देश के बड़े भाग में बीजों का संकट उत्पन्न होगा। अत: राज्य की अनाज व बीजों की जरूरत को देखते हुए सरकार इस निर्णय पर तत्काल रोक लगाए।
--
-देश में हरितक्रांति के जनक और प्रतिष्ठित शोध संस्थान पंतनगर विवि की उपजाऊ भूमि को खुर्दबुर्द कर एयरपोर्ट का निर्माण करवाने संबंधी सरकार का निर्णय बहुत ही निंदनीय है। यहां नए नए बीजों के लिए शोध होता है। पूरी दुनिया के किसान उससे लाभान्वित होते हैं। ऐसा करने से विवि के शोध तो प्रभावित होंगे ही, आस-पास की भूमि की उर्वरता भी समाप्त हो जाएगी। यह एक अच्छे शोध संस्थान को खत्म करने की सरकार की सुनियोजित साजिश है। यूकेडी इसका पुरजोर विरोध करता है और इसके लिए आंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी। -काशी सिंह ऐरी, संरक्षक- यूकेडी
-सरकार एयरपोर्ट बनाए और जरूर बनाए लेकिन इस बात का ख्याल रखे कि जब देश खाद्यान्न संकट था तब विवि ने ही हरितक्रांति लाकर देश को मुश्किल से उबारा है। यहां होने वाले शोध देश व मानवता की भलाई के लिए होते हैं। इसलिए सरकार को चाहिए कि वह इस विवि की भूमि पर ऐसी कोई कार्य न करे कि उसकी भूमि खुर्दबुर्द हो। आज जो कृषि के समक्ष चुनौतियां हैं, उससे यह विवि ही निपटने में सक्षम है।
नारायण सिंह जंतवाल, संरक्षक- यूकेडी
यूकेडी के नेता होने के नाते हमारा स्पष्ट कहना है कि पंत विवि एक उच्च शैक्षणिक संस्थान है और यहां की मिट्टी बहुत ही महत्वपूर्ण है। जहां शोध कार्य चलते हैं। यदि इस संस्थान के प्रांगण में एयरपोर्ट बनता है तो इसकी आत्मा और उत्तराखंड की पहचान खत्म हो जाएगी। यह शोध करने वाले छात्रों के जीवन के साथ बहुत बड़ा खिलवाड़ होगा। यदि सरकार को उत्तराखंड में अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट बनाना ही है, तो पहाड़ों की तलहटी में बंजर भूमि पर बनाए। पंतनगर में एयरपोर्ट बनने से उत्तराखंड वासियों को नहीं यूपी के लोगों को लाभ मिलेगा।
विज्ञापन

शांति प्रसाद भट्ट, मुख्य केंद्रीय प्रवक्ता-यूकेडी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें