विकास का सपना संजोए उत्तराखंड वासियों के सपनों पर और किसी ने नहीं बल्कि सरकारों ने ही पानी फेर दिया। इस छोटे से प्रदेश ने जैसे ही चलना सीखा तो जनप्रतिनिधियों और अफसरशाही ने उसे नोंचना शुरू कर दिया। यही कारण रहा है कि आज इस प्रदेश के विकास की तमाम घोषणाएं भ्रष्टाचार और हीलाहवाली के मकड़जाल में फंसी हैं।
रुद्रपुर के आईएसबीटी के साथ भी ऐसा ही हुआ। वर्ष 2005 में जब विकास पुरुष नारायण दत्त तिवारी ने इस प्रदेश के मुखिया के तौर पर बागडोर संभाली तो सिर्फ उन्होंने ही राज्य के विकास के लिए जो भी बड़ी-बड़ी योजनाएं थी वह मंजूर कर दी। उन्हीं में से आईएसबीटी भी एक था। शहर के किच्छा बाईपास स्थित एफसीआई के पास सरकार ने परिवहन विभाग को करीब 8 एकड़ जमीन भी दे दी, जो वर्तमान में परिवहन विभाग की है, लेकिन अंतरराज्जीय बस अड्डे के निर्माण में राजनेताओं की अनदेखी कहें या अफसरों का नकारापन, आज तक इस ओर एक कदम भी नहीं बढ़ा।
भूमाफिया की भी है नजर
किच्छा बाईपास पर स्थित बेशकीमती परिवहन विभाग की जमीन पर पिछले दो वर्ष से भूमाफिया की भी नजर है। विभाग की उदासीनता के चलते दो बार इस जमीन पर कब्जे की भी कोशिश हो चुकी है। दो बाहुबली भूमाफिया के बीच इस जगह को लेकर गोलियां भी तड़तड़ाई हैं। इस जमीन पर अब धीरे-धीरे झुग्गी-झोपड़ी वालों ने कब्जा करना शुरू कर दिया है। हालांकि, पिछले वर्ष मई-जून में जिला प्रशासन ने यहां से कब्जेदारों को खदेड़ दिया था, लेकिन अब फिर से इस जमीन पर कब्जा शुरू हो गया है।
जिला स्तर पर करेंगे सहयोग : डीएम
जिलाधिकारी डा. पंकज पांडे के अनुसार यूं तो आईएसबीटी के निर्माण में परिवहन निदेशालय से ही पहल की जानी है, लेकिन जिला स्तर पर अंतरराज्जीय बस अड्डे के निर्माण में जो भी सहयोग की जरूरत होगी, की जाएगी। उन्होंने कहा कि रुद्रपुर में आईएसबीटी बनने से यातायात की बहुत सी सुविधाएं ऊधमसिंह नगर और बाहरी प्रांतों के लोगों को मिलेंगी।